मेरी यात्रा पर निबंध हिंदी में (Yatra Par Nibandh in Hindi)

यात्रा वृतांत पर निबंध हिंदी में

1 . परिचय, 2 . लाभ, 3 . अतीत एवं वर्तमान में तुलना, 4 . यात्रा कैसे की जाए ? 5 . उपसंहार ।

1. सभी व्यक्तियों को समान रूप से दूर के एवं धार्मिक तथा ऐतिहासिक महत्त्व के स्थानों को देखने की इच्छा रहती है। यह इच्छा यात्रा के द्वारा ही पूरी होती है।

बहुत-से लोगों की इच्छा तीर्थस्थानों के दर्शन तक ही सीमित रह जाती है। कुछ लोग केवल व्यावसायिक कार्य से यात्रा करते हैं। भारतवर्ष में बहुत कम लोग ऐसे हैं जो यात्रा के ख्याल से यात्रा करते हैं। शायद गरीबी ही इसका कारण है।

2 . यात्रा बड़ी अच्छी चीज है। यह लोगों को विश्व के दूसरे भाग के लोगों के संपर्क में आने में सहायता प्रदान करती है। उनके आचार-विचार एवं रहन-सहन के ढंग का अध्ययन करने का अवसर उन्हें मिलता है।

यह (यात्रा) लोगों के दृष्टिकोण को विस्तृत करती है और लोगों को सहनशीलता, धैर्य, सहानुभूति एवं दान के गुण सिखाती है। नियमित रूप से यात्रा करनेवाला व्यक्ति सबसे अधिक जानकारी रखनेवाला होता है। उसे किसी देश की भौगोलिक बनावट का सुंदर ज्ञान रहता है क्योंकि वह उन वस्तुओं को अपनी आँखो से देखे हुए रहता है।

यात्रा से काफी आनंद भी प्राप्त होता है। यात्री को सुंदर दृश्य देखने का अवसर मिलता है। दूर-दूर की यात्रा करनेवाले लोग बहुत-से देशों की शिक्षा एवं व्यवसाय की पद्धति जान जाते हैं। वे अपने यहाँ की प्रचलित पद्धति से उसकी तुलना करते हैं और सुधार लाते हैं।

उन्हें काफी अनुभव हो जाता है और वे आसानी से ठगे नहीं जा सकते या कोई उन्हें आसानी से धोखा नहीं दे सकता। वे कला एवं मूर्ति-कला की दुर्लभ कृतियों को देखते हैं और इस तरह उनकी अभिरुचि परिष्कृत हो जाती है।

3 . पुराने समय में यात्रा करना सुरक्षित नहीं था। इसमें अधिक खर्च भी होता था। इसलिए बहुत-से लोगों को दूर के देशों की यात्रा करने का सौभाग्य प्राप्त न था। यातायात के साधनों का अधिक विकास नहीं हुआ था और अच्छी सड़कें भी न थीं। इसलिए यात्रा में अधिक खतरा उठाना पड़ता था ।

आज परिस्थिति पूर्णतया बदल गई है। आजकल यात्रा सस्ती हो गई है। आजकल यह सभी की पहुँच के भीतर की वस्तु हो गई है। अतः, हर किसी को यात्रा करने एवं अन्य-अन्य देशों को देखकर अपने ज्ञान को विकसित करने की चेष्टा करनी चाहिए।

4 . बहुत-से लोग यात्रा का सच्चा अर्थ नहीं जानते। वे कोई स्थान देखने जाते हैं, बाजारों में घूमते हैं और लौट आते हैं। यह यात्रा का ढंग नहीं है। लोगों को पूछताछ करनी चाहिए तथा किसी देश के मुख्य एवं आनंददायक स्थानों का निरीक्षण अवश्य करना चाहिए। तभी उन्हें उस स्थान का सच्चा ज्ञान प्राप्त होगा।

Final Thoughts –

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