वर्तमान समय में युवाओं में ट्रेकिंग को लेकर रुझान काफी बढ़ता जा रहा है। अपने आप में आत्मविश्वास जगाने और कुछ नया करने के जुनून के साथ-साथ ट्रेकिंग युवाओं में सहयोग की भावना को भी बढ़ाता है। ट्रेकिंग के दौरान मनुष्य अपने आप को कुदरत से जुड़ा महसूस करने लगता है।

ऐसे में जब अधिकतर युवा ट्रेकिंग की ओर खींचते चले जा रहे हैं तो देश भर में ट्रेकिंग को लेकर नई-नई जगह भी सामने आ रही हैं।

ट्रेकिंग की ऐसी ही एक शानदार जगह महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित है। पुणे के वीसापूर गांव में स्थित विसापुर फोर्ट ट्रेक देश की सबसे शानदार ट्रेकिंग जगहों में से एक है।

01. विसापुर ट्रेक और फोर्ट

विसापुर ट्रेक विसापुर किले के क्षेत्र में आता है। विसापुर किला महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा ऊंचाई वाले किलों में से एक है। यहां वैसे तो देश भर से ट्रेकिंग के दीवाने आते हैं मगर मुंबई और पुणे के लोगों के लिए यह सबसे पसंदीदा ट्रेकिंग स्पॉट है।

विसापुर किला एक पहाड़ी पर स्थित है। इस प्राचीन किले का निर्माण 18वीं सदी में बालाजी विश्वनाथ ने करवाया था। बालाजी विश्वनाथ मराठा साम्राज्य के प्रथम पेशवा थे।

02. विसापुर का इतिहास

विसापुर की ट्रेकिंग में पर्यटकों को एडवेंचर के साथ-साथ इतिहास से रूबरू होने का मौका भी मिलता है। बालाजी विश्वनाथ द्वारा निर्मित विसापुर किले का निर्माण लोहागढ़ किले के बनने के काफी बाद करवाया गया था। वीसापुर का निर्माण लोहागढ़ किले की सुरक्षा के लिए किया गया था। किसी परिस्थिति में यदि कोई भी दुश्मन लोहागढ़ पर आक्रमण करता तो विसापुर से दुश्मनों पर जवाबी हमला किया जा सकता था। यह दोनों ही किले सातवाहन वंशों के शासनकाल में बनवाये गए थे। 4 मार्च 1818 को ब्रिटिश सैनिकों ने भारी तादाद में हमला कर विसापुर को अपने नियंत्रण में ले लिया था। विसापुर के बाद ही लोहागढ़ भी अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया था।

03. किवदन्तियां कहती है पांडवों ने बनवाया था विसापुर किला

समुद्र तल से 3556 मीटर की ऊंचाई वाले विसापुर किले के निर्माण को लेकर कई लोगों में मतभेद है। कुछ लोगों का मानना है कि इस किले का निर्माण बालाजी विश्वनाथ ने करवाया था। इस तथ्य के ऐतिहासिक प्रमाण भी इतिहासकारों को मिले हैं। वहीं कुछ लोगों में यह किवदन्तियां हैं कि इस किले का निर्माण पांडवों द्वारा करवाया था। हालांकि इस तथ्य के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलते हैं। वर्तमान में इस किले के अब अवशेष मात्र बचे हुए हैं। खंडहर बन जाने के बावजूद अपने आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य की वजह से यह किला ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए आज भी ख़ास बना हुआ है।

Visapur-Fort-Mumbai

04. विसापुर फोर्ट की वास्तुशैली

विसापुर किले के चारों तरफ परकोटा बना हुआ है। इसके अंदर पानी की व्यवस्था के लिए कुआं भी बनाया गया है। लोग मानते हैं इस कुएँ का निर्माण पांडवों ने किया था।

इस किले में कई छोटे-छोटे मंदिर भी बने हुए हैं। भगवान हनुमान किले के वासियों के तत्कालीन समय में आराध्य देव थे। उनका मंदिर आज भी किले में मौजूद है। इसके अलावा भगवान शिव का मंदिर भी अभी तक व्याप्त है।

अपने समय में भव्यता के साथ खड़ा रहने वाला यह किला वर्तमान समय में पत्थरों के अवशेष के रूप में अपनी शान बनाये खड़ा है। बारिश के दिनों में इसके चारों तरफ़ से पहाड़ी की तलहटी की ओर झरने बह उठते हैं। उस समय मंजर जन्नत से कम नहीं होता।

05. जोश के साथ मानसिक सुकून भी है विसापुर फोर्ट ट्रेकिंग में

विसापुर का सफर अपने आप में बहुत कुछ समेटे हुए है। यहां इतिहास की तारीखें खण्डहरों से आवाज लगाती सुनाई देती हैं।

आसपास के जंगलों के पेड़ों पर से उड़ते पक्षी किले के पहाड़ी की तरफ जन्नत की उड़ान भरते हुए महसूस होते हैं। पहाड़ी पर ट्रेकिंग से निकला पसीना हर नए कदम पर जोश बढ़ाता जाता है।

विसापुर सुकून भरा रोमांच देने वाला ट्रेक है। आपके पास एक अच्छा कैमरा हो तो आप यहां की वादियों से ज़िन्दगी भर की यादें समेट कर घर लौटते हैं।

06. विसापुर ट्रेक पर जाने का सबसे उपयुक्त समय

विसापुर जाने का सबसे सही समय शुरू होता है मानसून के आगमन के साथ। जून के मध्य से सर्दियों की शुरूआत के बीच आप कभी भी यहां जा सकते हैं। यानी यहां जाने के लिए जून से फरवरी के बीच का समय सबसे उपयुक्त होता है।

बारिश के दौरान कुदरत यहां जवान हो उठती है। आसपास की पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़े इठलाने लगती है। वह मंजर आपको पहाड़ पर चढ़ते हुए कभी थकान महसूस नहीं होने देता। हवा में उड़ते बादल पहाड़ी को काटते हुए गुज़रते हैं। ऐसा लगता है जमीन और आसमान जुड़ गए हों।

07. कैसे जाएं विसापुर

विसापुर ट्रेक पर परिवहन के सभी माध्यमों की मदद से जाया जा सकता है।

विसापुर से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पुणे एयरपोर्ट है। जो यहां से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही लोनावला के लिए बस या टैक्सी मिल जाती है। लोनावला पहुंच कर आप विसापुर के लिए कैब या टैक्सी कर सकते हैं।

यहां से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन लोनावला है। वहां से आप टैक्सी या कैब की मदद से विसापुर पहुंच सकते हैं।

सड़क मार्ग की बात की जाए तो यहां सड़कों की हालत सही है। साथ ही विसापुर अन्य स्थानों से अच्छी तरह से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

08. किन बातों का रक्खे ख्याल

अपने साथ ट्रेकिंग के दौरान पानी अवश्य लेकर जाएं क्योंकि ऊपर किले पर चढ़ाई के दौरान पानी की कोई व्यवस्था नहीं मिलती है।

इसके साथ ही खाने पीने की हल्की चीजें भी अपने साथ लेकर चलें।

आप अगर मानसून के दौरान जा रहे हैं तो अच्छी ग्रिप वाले जूते पहन कर चले क्योंकि उस दौरान ट्रेक काफी फिसलन भरा हो जाता है।

पहाड़ी के ऊपर किले पर कैम्पिंग की कोई व्यवस्था और सुविधा नहीं है अतः ट्रेकिंग की शुरुआत सुबह जल्दी करें ताकि रात होने से पहले नीचे लौट कर वापिस आया जा सके।

अपने बैगपैक में जरूरी दवाइयां और कपड़े भी रखें। बारिश में कपड़े बदलने की ज़रूरत पड़ जाती है।

विसापुर ट्रेक पर 5 से 6 घण्टे के सफर के दौरान बारिश के मौसम में आप अपने आप को कुदरत से जुड़ा पाते हैं। यहां फैले सुकून से दिन का सफर आपको रात की सी शांति का एहसास दिलाता रहता है।

यहां चढ़ाई के बाद आप जब ऊपर पठारी हिस्से पर पहुंचते हैं तो आसमान में छत पर खड़े होने का एहसास महसूस करते हैं।

अगर आपको ट्रेकिंग पसन्द है। उसके दौरान आप इतिहास और वर्तमान को जुड़ते देखना चाहते हैं तो अपनी ट्रेवल विश लिस्ट में विसापुर फोर्ट ट्रेक को एड कर लीजिए।