सदियों से आस्था ने इंसानी जीवन को वो संबल और सुकून दिया है जो किसी और भाव ने इतनी पवित्रता के साथ नहीं दिया। जब भाव में भोलेपन का साथ हो तो श्रद्धा की बयार भोलेनाथ की तरफ बह चलती है। पहाड़ों में अपना वास बनाने वाले शिव के दुनियाभर में कई तीर्थ स्थान हैं, जहां भक्त जाकर सुकून और शांति पाते हैं। ऐसे ही स्थानों में एक स्थान है, उत्तराखंड के रुद्र प्रयाग जिले में स्थित तुंगनाथ महादेव मंदिर। इस मंदिर को दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। यह मंदिर कई मायनों में ख़ास है। यह धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक रूप से सम्पन्नता धारण किये हुए है। यहां की यात्रा अपने आप में एक सार्थकता लिए होती है। लाखों लोग यहां हर साल दर्शन को आते हैं।

1. पंच केदारों में से एक है तुंगनाथ-

तुंगनाथ मंदिर को उत्तराखंड राज्य में स्थित पंच केदारों में शामिल किया गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि जब महाभारत के युद्ध में काफी भयंकर रूप से नरसंहार हुआ तो भगवान शिव पांडवों से क्रोधित हो गए थे। तत्पश्चात भगवान शिव को मनाने के लिए पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। यहीं पर पांडवों ने भोलेनाथ की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया था।
मान्यता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए तो उनके धड़ से ऊपर का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ। जहां आज पशुपतिनाथ का मंदिर विराजमान है। शिव की भुजाएं तुंगनाथ में, नाभि मध्यमहेश्वर में, मुख रुद्रनाथ में, जटा कल्पेश्वर में, वहीं शिव बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते हैं।

2. प्रकृति की मनमोहक वादियों में विराजते हैं Tungnath Mahadev

Tungnath Mahadev Mandir समुद्र तल से 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। दीवाली के बाद November से March के बीच के वक़्त भारी बर्फबारी की वजह से मंदिर बन्द रहता है।
यहां चोपता से आगे मंदिर के मार्ग में आपको सुंदर घास के ढ़लवा मैदान ‘बुग्याल’ देखने को मिलेंगे। कुदरत खुले दिल से यहां श्रद्धालुओं का स्वागत करती है।

3. शिव के साथ कुदरत का संगीत बजता है इन वादियों में

Tungnath Mahadev Mandir की सुंदरता बारिश के बाद के महीनों में खुल कर देखने को मिलती है। ज्यादा ऊंचाई की वजह से यहां पेड़ कम और घास के मैदान बहुतायत से पाए जाते हैं। कुछ लोग इसकी तुलना “स्विट्जरलैंड” से करते हैं।

इस क्षेत्र से सबसे प्रसिद्ध स्थल चोपता के बारे में औपनिवेशिक दौर में अंग्रेज कमिश्नर एटकिंसन ने कहा था कि “जिस इंसान ने अपने पूरे जीवन में चोपता नहीं देखा उसका धरती पर जन्म लेना व्यर्थ है।” यहां जाना काफी रोमांचकारी अनुभव होता है।

गढ़वाल क्षेत्र में सबसे आसानी से बुग्याल इसी क्षेत्र में देखे जा सकते हैं।

4. ताल और सरोवरों से घिरा है क्षेत्र

चोपता के नज़दीक देवहरिया ताल है। यह तुंगनाथ महादेव से दक्षिण दिशा में अवस्थित है। यहां का पानी काफी साफ रहता है। इस वजह से इसे पारदर्शी ताल भी कहा जाता है। ताल के साफ पानी में दिन के समय नीलकंठ, चौखम्बा की बर्फ़ से ढ़की चोटियों को आसानी से देखा जा सकता है। इस सरोवर का व्यास लगभग आधा किलोमीटर तक फैला हुआ है। ताल के आस-पास के क्षेत्र में बांस और बुरांश के घने जंगल पाए जाते हैं।

यहां के जंगलों में कस्तूरी हिरन भी देखे जा सकते हैं।

[Image Source: Wikipedia]

5. ऐतिहासिक और दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है Tungnath Mahadev Mandir

Tungnath Mahadev Mandir लगभग 1000 साल पुराना है। इस वजह से इसका ऐतिहासिक महत्त्व काफी बढ़ जाता है। यह मध्यकालीन भारत की वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ही इसका निर्माण उसी के अनुरूप किया गया है।

इतनी ऊंचाई पर इस मंदिर का निर्माण करवाना तत्कालीन समय में काफी चुनौतीपूर्ण कार्य रहा होगा। धार्मिक और प्राकृतिक महत्त्व वाले तुंगनाथ के ऐतिहासिक महत्त्व की वजह से भी यह जगह काफी महत्त्वपूर्ण हो जाती है। इससे जुड़ी कई जानकारियां उत्तराखंड ट्यूरिज्म की वेबसाइट पर भी देखने को मिलती है।

6. कैसे पहुंचे Tungnath Mahadev Mandir?

Tungnath Mahadev Mandir के लिए हवाई रास्ते से अगर आप जाते हैं तो यहां सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून है। वहां से बस या अन्य साधनों से तुंगनाथ पहुंचा जा सकता है।
रेल माध्यम से जाने पर नज़दीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश हैं। यहां से सड़क मार्ग से तुंगनाथ पहुंचा जा सकता है।

ऋषिकेश से गोपेश्वर होते हुए चोपता तक सड़क मार्ग है। चोपता से 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा से तुंगनाथ पहुंच सकते हैं।

एक दूसरा मार्ग भी है जिसमें ऋषिकेश से ऊखीमठ होकर चोपता जाते हैं।

7. कहा रुके?

ऊखीमठ और गोपेश्वर दोनों ही स्थानों पर ठहरने के कई स्थान आपको मिल जाएंगे। यहां पर आम और ख़ास दोनों तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं। बजट के अनुसार आप अपने ठहरने का स्थान चुन सकते हैं। इन दोनों ही जगहों पर गढ़वाल मंडल विकास निगम के विश्रामालय भी मिल जाएंगे। पर्यटकों की बढ़ती तादाद को देखते हुए अब चोपता में भी ठहरने के लिए कई प्राइवेट होटल और लॉज खुल चुके हैं।

कई स्थानीय लोगों ने अपने यहां ‘होम स्टे’ की व्यवस्था भी उपलब्ध करवा रक्खी है। मामूली कीमतों पर आपको यह सुविधा उपलब्ध हो जाती है।

[Image Source: Wikipedia]

8. इन चीजों का रक्खे ख़ास ध्यान

चोपता का क्षेत्र 12,000 फीट की ऊंचाई पर है। यहां से तीन किलोमीटर की यात्रा Tungnath Mahadev Mandir की है। इस चढ़ाई के सफर में पहुंचते-पहुंचते Tungnath की ऊंचाई 13,000 फीट हो जाती है। इस वजह से यहां साल भर ठंड रहती है। यहां जब भी जाये तो अपने साथ गर्म कपड़े अवश्य लेकर जाएं।
यहां मौसम काफी तेजी से बदलता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो वो ज़रूरी दवाइयां साथ लेकर जाएं।

वैसे यहां कितनी भी दिक्कतें मार्ग में आये मगर जब एक बार आप ऊपर मंदिर का मार्ग तय कर लेते हैं तो सारी थकान और समस्याएं भूल जाते हैं।

9. भगवान राम ने भी की थी उपासना

Tungnath को लेकर एक मान्यता यह भी है कि रावण का वध करने के बाद भगवान श्री राम ने यहां आ कर शिव की तपस्या की थी।

पहाड़ धरती की उन प्राकृतिक जगहों में एक है जहां सबसे ज्यादा सुकून मिलता है। पहाड़ धैर्य सिखाते हैं। तुंगनाथ मंदिर में जा कर व्यक्ति अपने आप को भूल कर प्रकृति में खो जाता है। यही एहसास इंसान को भगवान से और कुदरत से जोड़ता है।