दुनिया के किसी भी कोने में चले जाइये हर जगह पहाड़ अपनी ओर आकर्षित कर ही लेते हैं। पहाड़ ठहराव के प्रतीक की तरह नज़र आते हैं। रफ़्तार बन चुकी ज़िंदगी पहाड़ों पर जाकर ठहर सी जाती है। इन्हीं ठहराव भरे शांत पहाड़ों का दूसरा एडवेंचरस और रफ़्तार भरा रूप भी है जो रोमांच पसन्द लोगों को पहाड़ों की तरफ खींच कर ले जाता है।
पहाड़ पर आप शांति के लिए जा सकते हैं तो पहाड़ों पर आप जम कर रोमांच का आनंद भी उठा सकते हैं। ख़ास कर बर्फीले पहाड़ जहां अनेकों एडवेंचरस एक्टिविटीज होती हैं। बर्फीले पहाड़ों पर रोमांच के शौकीनों का सबसे पसंदीदा खेल होता है बर्फ की चादर पर स्कीइंग करना।

भारत में स्कीइंग के दीवानों की सबसे पहली पसंद है उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित ‘औली’।

01. .देवदारों से घिरा, बर्फ में लिपटा खूबसूरत औली:

यूँ तो पहाड़ों वाली हर जगह अपने आप में ख़ास होती हैं मगर कुछ जगह ऐसी होती हैं जहां कुदरत दिल खोल कर महरबान हो जाती है। औली भी कुछ ऐसी ही जगह है जो खुदा की महरबानी पा गई। चारों तरफ बर्फ से लिपटे शांत लेटे हुए पहाड़। आकाश को चूमने की कोशिश करते ऊंचे-ऊंचे देवदार। हरे-भरे घास के मैदान। औली में वो सब कुछ है जो आपको जन्नत की कमी महसूस नहीं होने देगा।
यहां पहाड़ों की ऊंचाई 2500 मीटर से 3000 मीटर तक मिलती हैं।

02. देश में स्कीइंग के दीवानों की पहली पसंद:

  • जोश और जुनून के दीवानों की स्कीइंग करने की भारत में सबसे पसंदीदा जगह है औली।
  • सुंदर नज़ारों का आनंद लेते हुए आप यहां बर्फीले ढ़लानों पर हवा में उड़ने का एहसास पा सकते हैं।
  • औली में गढ़वाल मंडल विकास निगम द्वारा स्कीइंग सिखाने की भी व्यवस्था की गई है।
  • यहां आपको सर्टिफिकेट और नॉन सर्टिफिकेट कोर्सेज भी उपलब्ध होंगे। यहां कई प्राइवेट संस्थान भी स्कीइंग सिखाते हैं।
Auli-India

03. स्की के अलावा रोप वे भी देता है रोमांच का मजा:

  • औली में आपको रोप वे की व्यवस्था भी मिलती है। इस रोप वे की स्पीड देश के बाकी रोप वे से ज्यादा है।
  • बादलों के साथ उड़ने का एहसास लेना हो तो आप इस रोप वे की यात्रा का अनुभव ले सकते हैं।

04. इतिहास की तारीखों में औली:

  • इतिहास के पन्नों में सबसे पहले 8वीं सदी में इस खूबसूरत जगह का ज़िक्र मिलता है।
  • लोगों का मानना है कि आर्यावर्त के दौरे पर निकले आदि शंकराचार्य यहां भी अपनी यात्रा के दौरान पधारे थे।
  • औली में स्थित नन्दप्रयाग अलकनंदा और नन्दाकिनी नदियों के संगम पर बसा हुआ है। यहां डुबकी लगाना पवित्र माना जाता है। इसे केदारनाथ और बद्रीनाथ का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है।

05. औली जाने से पहले ध्यान दें इन बातों पर:

  • औली में बहुत तेज़ ठंड पड़ती है। यहां की ठंड इसे एक विषम परिस्थितियों वाला डेस्टिनेशन बना देती हैं।
  • यहां जाने से पहले उचित मात्रा में गर्म कपड़ों की व्यवस्था कर लेनी चाहिए।
  • कपड़ों के अलावा उच्च क्वालिटी वाले जूतों की यहां बहुत जरूरत पड़ती है। बर्फ में अच्छे जूतों के बिना आसानी से बर्फ का मजा नहीं लिया जा सकता।
  • अधिक ऊंचाई पर सूरज की रौशनी में हानिकारक किरणों का प्रभाव बढ़ जाता है अतः गॉगल्स का इस्तेमाल अवश्य करें। यह आपकी आंखों की सुरक्षा करेगा।
  • सर्द जगहों पर निर्जलीकरण की समस्या बढ़ जाती है इसलिए थोड़े-थोड़े समय में तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।
  • शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रह कर ही औली जैसी जगहों के शानदार नज़ारों का लुत्फ उठाया जा सकता है।

06. किस समय जाना बेहतर:

  • औली इतनी सुंदर जगह है कि यहां साल के किसी भी वक़्त जाया जा सकता है।
  • आपको अगर एडवेंचर और स्कीइंग करने के उद्देश्य से यहां जाना हो तो नवम्बर से अप्रैल का समय सबसे बेस्ट रहेगा। इन महीनों के बीच यहां भारी बर्फबारी होती है। आप अनेक आउटडोर एक्टिविटीज़ का मजा इस समय ले सकते हैं।
Sking Resort Auli

07. औली के नजदीकी आकर्षण:

  • औली में सरकार द्वारा एक आर्टिफिशियल झील का निर्माण करवाया गया है। जिस साल बर्फबारी कम होती है तो स्कीइंग के दीवानों को निराश होने से बचाने के लिए इस झील की मदद से कृत्रिम बर्फ बनाई जाती है।
  • औली में ओक के घने पेड़ों के बीच एक खूबसूरत जगह हैं जिसे ‘गुरसो बुग्याल’ कहा जाता है। यहां छोटा सा जलाशय भी है।
  • औली में ट्रैकिंग भी की जा सकती है।
  • यहां 7 हज़ार मीटर की ऊंचाई पर त्रिशूल पर्वत भी एक प्रमुख ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन है। इस पहाड़ की जड़ों में खूबसूरत रूपकुंड झील भी देखने लायक स्थान है।

08. कैसे पहुंचे औली:

  • हवाई मार्ग से जाने के लिए यहां से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट देहरादून का जॉली ग्रैंट एयरपोर्ट पड़ता है। वहां से लगभग 220 किलोमीटर औली की दूरी है। यहां से सड़क मार्ग से औली पहुंचा जा सकता है।
  • रेल से आने पर सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। जो औली से 230 किलोमीटर के आसपास पड़ता है। यहां से आगे टैक्सी और बसों की सुविधा से औली पहुंच सकते हैं।
  • रोड़ ट्रिप के शौकीन लोग अपनी गाड़ी, बस, कैब और टैक्सी के द्वारा यहां पहुंच सकते हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून और दिल्ली से औली के लिए बस सुविधा मिल जाती है।

09. रुकने की व्यवस्था:

  • औली में ठहरने की काफी अच्छी व्यवस्थाएं हैं। हाल के कुछ सालों में औली एक ट्यूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में काफी तेजी से उभरा है। उसी रफ्तार से यहां होटल्स, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट भी बढ़े हैं।
  • गढ़वाल विकास निगम की तरफ से यहां एक होटल बनवाया गया है जिसमें 100 से ज्यादा कमरों की व्यवस्था है। यहां किफायती दरों पर आपको सुविधाएं मुहैया करवाई जाती हैं।
  • यहां भारत-तिब्बत पुलिस का एक रेस्टोरेंट भी बना हुआ है।
  • यहां से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी पर जोशीमठ स्थित है। जोशीमठ में भी आप ठहर सकते हैं। वहां रुकने की कई ऑप्शन मौजूद हैं।

दिन अगर रुई सी नरम बर्फ में और रातें खुले साफ आसमान में तारों के नीचे बिताना चाहते हैं तो औली जरूर जाइये। बर्फ के ढलवा पहाड़ों पर हवा की रफ्तार से स्कीइंग का मजा लूटना चाहते हैं तो औली आपको बिल्कुल निराश नहीं होने देगा। औली में नन्दा देवी की पहाड़ियों से निकलता सूरज देखना एक सुकून भरा एहसास दिलाता है। औली एक फूल पैकेज की तरह हैं जहां कुदरत की खूबसूरती, पहाड़ों का सुकून, मनोरम झीलें और एडवेंचर स्पोर्ट्स मिल जाते हैं। अगली छुट्टियों में यह आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।