ख़्वाजा मीर दर्द का एक शेर है जिसकी एक पंक्ति में कहा गया है- “सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ”

एक इंसान जीवन में आता और अपने हिस्से की जिम्मेदारियों को पूरा कर लौट जाता है। ऐसे में उसके जीवन के कई पड़ाव और अनुभवों से वो होकर गुजरता है। जीवन के सबसे ख़ास और हमें मेच्योर बनाने वाले अनुभव वो होते हैं जो हम यात्राओं के दौरान हासिल करते हैं। इंसानी सभ्यता की शुरुआत से लेकर आज तक इंसान का यात्रा करने का जज़्बा और शौक बरकरार है। हमारे देश में भी यात्राओं के कई सफर और मुकाम है। आज हम इन मुकामों में से एक ‘मढ़े घाट’ के बारे में जानेंगे।

1. सहयाद्रि की पहाड़ियों में छिपा है मढ़े घाट:

भारत के दक्षिण-पश्चिम में समुद्र से सटे भौगोलिक क्षेत्र को पश्चिमी घाट कहा जाता है। यह दुनिया के गिने-चुने हॉट स्पॉट में आता है। हॉट स्पॉट उस क्षेत्र को कहते हैं जहां वनस्पति और जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती है। प्राकृतिक रूप से सम्पन्न इसी पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में है ‘मढ़े घाट’। यह महाराष्ट्र के पुणे से लगभग 62 किलोमीटर दूर स्थित है। प्रशासनिक रूप से यह रायगढ़ जिले की सीमा में आता है।

2. मढ़े घाट की खूबसूरती मानों स्वर्ग का कोई बगीचा हो:

पुणे शहर से दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस खूबसूरत घाट की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 850 मीटर है। तोरणा किले के पीछे घने जंगलों में मढ़े घाट खूबसूरत फिज़ाओं की बीच घिरा हुआ है।
इस घाट पर खूबसूरत झरना भी गिरता है। जिसे कुछ स्थानीय लोग लक्ष्मी जलप्रपात कह कर सम्बोधित करते हैं। यहां हल्की ठंड हमेशा बनी रहती है। यह एक उभरता हुआ हिल स्टेशन है।
पश्चिमी घाट की हरियाली से घिरी इन पहाड़ियों में जब हम घाट पर गिरते झरने को देखते हैं तो पानी के गिरने से बनी धुंध में लगता है पानी आसमान से गिर रहा हो। यहां का माहौल इस दृश्य को काफी खूबसूरत और स्पेशल बना देता है।

3. कई ऐतिहासिक किलो की छांव में है मढ़े घाट:

मढ़े घाट का इलाका इतिहास के दौर में सामयिक दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण रहा है। मढ़े घाट के आसपास के क्षेत्र में तोरणा किला, राजगढ़ किला और रायगढ़ किला बने हुए हैं। इतिहास की कई घटनाओं का साक्षी रहा है मढ़े घाट। सिंहगढ़ की लड़ाई में वीर योद्धा तानाजी मालुसरे की मृत्यु के बाद उनके मृत शरीर को उनके पैतृक गांव मढ़े घाट के रूट द्वारा ही ले जाया गया था। मढ़े घाट से लिंगाणा किला भी नज़र आता है। इस किले का उपयोग छत्रपति शिवाजी अपने कैदियों को बंद रखने के लिए करते थे।

Madhe-Ghat

4. मढ़े घाट कब जाएं:

औसतन देखा जाए तो मढ़े घाट का तापमान 25 डिग्री के आस पास बना रहता है। इस हिसाब से यहां सालभर कभी भी जा सकते हैं। मगर पहाड़ियों की सुंदरता और पानी के झरने के अप्रतिम रूप को देखने के लिए मानसून का मौसम सबसे बेस्ट रहता है। यहां जाने की कोई एंट्री फीस नहीं है। किसी तरह की कोई टाइमिंग का निर्धारण भी अभी यहां नहीं किया गया है। सुबह से शाम कभी भी आप जा सकते हैं। वैसे भी औसतन दो घण्टे में आप मढ़े घाट के दृश्यों को समेट लेते हैं।

5. कैसे जाएं मढ़े घाट:

मढ़े घाट जाने के लिए आपको सबसे पहले पुणे शहर जाना होगा। पुणे भारत के सभी प्रमुख शहरों से हवाई, रेल और सड़क तीनों मार्गों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
पुणे जाने के बाद मढ़े घाट जाने के मुख्य रूप से दो रुट है। यहां सार्वजनिक परिवहन साधनों की आवाजाही थोड़ी कम है इसलिए खुद के साधन से जाने या किराए पर साधन बुक कर लेना ज्यादा सुविधाजनक रहता है।
पुणे से एक रूट: पुणे- खडकवासला- सिंहगढ़- पाबे घाट- वेल्हे- मढ़े घाट- वेल्हे- नसरपुर फाटा- पुणे है।
दूसरा रूट: पुणे- नसरपुर- वेल्हे- मढ़े है। इसी रूट से पुणे वापसी की जाती है।
सुंदर हरे-भरे रास्तों से गुजरने पर रास्ता कब कट जाता है पता ही नहीं चलता। रास्ते में फैली हरियाली के बीच भी पहाड़ों में छोटे-मोटे कई झरने आते हैं।

6. इन बातों का रखे विशेष रूप से ख्याल:

  • मढ़े घाट सबसे सुंदर बारिश के मौसम में लगता है तो इस समय जब आप जाएं तो अपने साथ भीगने से बचने के सारे इंतज़ाम करके जाएं।
  • यहां वेल्हे में जरूरत का सामान जैसे खाने-पीने की वस्तुएं उचित दाम पर मिल जाती हैं तो या तो पहले से सब सामान खरीद कर लाये या यहां खरीद ले। पहाड़ी पर इस तरह की कोई व्यवस्था आपको नहीं मिलेगी जहां आप कुछ खरीद सके।
  • बारिश के दिनों में यहां का रास्ता कीचड़ भरा हो जाता है तो अच्छी ग्रिप वाले जुते पहन कर ही जाएं।
  • अपने वाहन आप वाटरफॉल के एंट्री गेट पर रहने वाले सिक्योरिटी गार्ड्स के पास पर्ची कटवा कर जमा करवा सकते हैं। यदि आप लोकल है तो बिना पर्ची के भी आपका काम चल जाएगा।
  • छुट्टी के दिन जैसे कि वीकेंड पर यहां जाने से बचना चाहिए। उन दिनों यहां भीड़ बढ़ जाती है।

7. रुकने की व्यवस्था:

मढ़े घाट अभी उभरती हुई टयूरिस्ट डेस्टिनेशन है। इस वजह से यहां कोई सरकारी धर्मशाला या रिसोर्ट नहीं है। प्राइवेट रिसोर्ट भी बिल्कुल नज़दीक नहीं है। 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में आपको कई रिसोर्ट ज़रूर मिल जाते हैं। जहां आपको सभी सुविधाएं मिल जाएंगी। इसके अलावा यहां का आस पास का इलाका ट्रेकिंग और कैम्पिंग के लिए भी फेमस है तो आप होटल या रिसोर्ट में रुकने की बजाय थोड़ा एडवेंचर करना पसंद करते हैं तो खुद का कैम्प भी लगा कर रह सकते हैं।

पश्चिमी घाट इसकी खूबसूरती और जैविक महत्त्व की वजह से यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। भारत में पर्यटन की दृष्टि से काफी समृद्धता है। यहां रेगिस्तान से लेकर ग्लेशियर, मैदान से लेकर समुद्र तक हर तरह के प्राकृतिक नज़ारें मौजूद हैं। ऐसे में पश्चिमी घाट जिसे सहयाद्रि भी कहते हैं अपनी खूबसूरती की वजह से विशेष पहचान बनाये हुए है। मढ़े घाट भी पश्चिमी घाट की इसी खूबसूरती का एक चमकता मोती है। समुद्र से आने वाली मानसूनी हवाओं ने हमेशा से इस इलाके को हरियाली से भरपूर रखा है। प्रकृति के साथ जुड़ना चाहते हैं तो कुछ वक्त मढ़े घाट में ज़रूर बिताना चाहिए। प्रकृति और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ाव महसूस करके आप भी अपने आप को कुदरत और इतिहास की तारीखों से जुड़ा महसूस करेंगे।