हमारे देश का इतिहास और इसकी संस्कृति दुनियाभर में अपनी एक अलग पहचान रखती है। भारत में सैकड़ों तरह के सामाजिक रंग देखने को मिलते हैं। प्रान्तों से बने भारत में राजस्थान प्रांत अपना एक अहम मुकाम रखता है। राजस्थान की राजधानी है जयपुर। जयपुर को विश्व में “पिंक सिटी” के नाम से भी जाना जाता है। जयपुर में यूँ तो कई पर्यटक स्थल हैं, मगर आज हम आपको कुछ ऐसे पर्यटक स्थलों के बारे में बताएंगे जहां अगर आप नहीं गए तो आपका जयपुर घूमना अधूरा रह जायेगा।

1. पन्ना मीणा का कुंड:

जयपुर में स्थित आमेर के विश्व प्रसिद्ध महलों से कुछ ही दूरी पर पन्ना मीणा का कुंड है।यह कुंड रियासतों के जमाने की बेजोड़ कारीगरी का उत्कृष्ट नमूना है। इस कुंड की विशेष आकार की सीढ़ियां, बरामदे और इसके अष्टभुजा किनारे इसकी खासियत है। इसके चारों और छतरियां भी बनी हुई हैं। कहा जाता है महाराजा जयसिंह के शासनकाल के समय पन्ना मीणा नामक व्यक्ति ने इस कुंड का निर्माण करवाया था। इस कुंड की खूबसूरती की वजह से केंद्र सरकार ने इस कुंड पर डाक टिकट भी जारी कर रखा है।

2. गलताजी का मंदिर:

  • यह प्रसिद्ध मंदिर जयपुर के रीगल शहर के बाहरी इलाके में स्थित है। यह एक प्राचीन हिंदू मंदिर है।
  • यह मंदिर गुलाबी रंग के बलुआ पत्थर से बना हुआ है। इस मंदिर की दीवारों पर सुंदर नक्काशी की गई है। इसके साथ ही दीवारों पर रंग-बिरंगी चित्रकारी भी देखने को मिलती है। इस मंदिर में कई कुंड और झरने भी है।
  • पहाड़ी इलाके में बना यह मंदिर किसी रियासत कालीन हवेली की तरह दिखता है।
  • यहां बने ‘गलता कुंड’ को काफी पवित्र माना जाता है। क्षेत्रीय लोगों का दावा है कि यह कुंड कभी नहीं सूखता। इस मंदिर में सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन का समय रहता है।

3. चोखी ढाणी:

  • चोखी ढाणी जयपुर टोंक रोड़ पर स्थित एक रिसोर्ट है। यह रिसोर्ट राजस्थानी ग्रामीण संस्कृति को प्रदर्शित करता है।
  • यहां आपको आधुनिकता और ग्रामीण जीवन का अदभुत संगम देखने को मिलेगा। यहां पूरे रिसोर्ट में राजस्थानी कलाकृतियों को दीवारों पर उकेरा गया है।
  • यहां रोज लोक नृत्य, गायन, ऊंट सवारी और इसी तरह की अनेक रोचक गतिविधियां होती हैं।
  • यहां आपको विशेष राजस्थानी व्यंजनों वाली थाली भी खाने को मिलेगी। जिसमें राजस्थानी पकवान होते हैं। यहां परिवार और दोस्तों के साथ जाना काफी शानदार अनुभव रहता है।

4. राज मंदिर सिनेमा हॉल:

  • महलों और किलों के शहर जयपुर में राज मंदिर सिनेमा हॉल अपनी विशेष पहचान बनाये हुए है।
  • अगर आप कला और संस्कृति प्रेमी हैं और साथ ही आपको फिल्मों का शौक है तो राज मंदिर से अच्छी कोई जगह आपके लिए नहीं हो सकती।
  • इस सिनेमा हॉल के अंदर और बाहर बारीक नक्काशी की गई है। यह पुरातन क्लासिक वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
  • इसे इसकी खूबसूरती की वजह से “प्राइड ऑफ एशिया” के सम्मान से नवाज़ा गया है। यह सिनेमा हॉल राजाओं के जमाने के किसी महल की याद दिलाता है। यहां का खूबसूरत लाईटिंग सिस्टम माहौल को खुशनुमा बना देता है।
  • यहां एक साथ 1300 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसी वजह से इसे एशिया का सबसे बड़ा सिनेमा हॉल कहा जाता है। यहां आप शाही अंदाज में फ़िल्म का मजा लेने जा सकते हैं।

5. जौहरी बाजार:

  • जयपुर शहर के गोपालजी का रास्ता और हल्दियों के रास्ते पर स्थित जौहरी बाजार अपने अंदर जयपुर के सारे रंग समेटे हुए है।
  • इस बाजार की खासियत इसके नाम से ही झलकती है। यहां सभी प्रकार के आधुनिक और परंपरागत शैली में बने आभूषण मिल जाएंगे।
  • आभूषणों के अलावा यहां शिल्पकला से जुड़ी हुई वस्तुएं भी मिलती हैं, जिन पर आपको राजस्थानी कला का असर साफ नजर आएगा।

6. अल्बर्ट हॉल संग्रहालय:

  • राजस्थान के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक अल्बर्ट हॉल राम निवास बाग परिसर में स्थित है। इस खूबसूरत इमारत का नाम प्रिंस ऑफ व्हेल्स “अल्बर्ट एडवर्ड” के नाम पर रखा गया है।
  • प्राचीन सिक्कों, विभिन्न हथियारों, अलग-अलग धातुओं के बर्तनों और अनेक पुरातात्विक वस्तुओं का आपको यहां पर संग्रह देखने को मिलेगा। वर्तमान समय में सरकार के नियंत्रण में आने वाले इस संग्रहालय की नींव 6 फरवरी 1876 में रखी गई थी। उस दिन से लेकर आज तक यह संग्रहालय अपने अंदर इतिहास की तारीखों को समेटता चला आ रहा है।

7. सवाई जयसिंह का जयगढ़ किला:

  • जयगढ़ किले का निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय ने साल 1726 में आमेर किले की सुरक्षा के लिए करवाया था। रियासत पर दुश्मनों के आक्रमण करने की स्थिति में जयगढ़ किला आमेर के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता था।
  • यह मजबूत किला सुरंग के माध्यम से आमेर किले से जुड़ा हुआ है। किले को विद्याधर नामक वास्तुशास्त्री ने बनाया था।
  • इस किले में मुगल और राजपूत शैली की मिश्रित वास्तुकला देखने को मिलती है। इस किले में आज भी पहियों पर रखी दुनिया की सबसे बड़ी तोप मौजूद है।
  • इस किले से जयपुर शहर का शानदार दृश्य देखने को मिलता है।

8. अनोखा हाथी गांव:

  • हाथी गांव भारत का पहला ऐसा गांव है जो बस हाथियों के लिए बनाया गया है। दुनिया में यह इस तरह का तीसरा गांव है।
  • आमेर किले के पास कुंडा गांव में बने इस हाथी गांव में हाथियों के रहने के सारे प्रबंध किए गए हैं। 100 एकड़ में फैले इस हाथी गांव में पर्यटक हाथी सफारी का आनंद लेने के साथ-साथ हाथियोंके रहन-सहन को भी नज़दीक से जान सकते हैं।
  • वर्तमान समय में यहां 109 हाथी रहते हैं। यहां आपको असम और केरल के हाथी भी देखने को मिल जाएंगे।
  • हाथियों पर माइक्रोचिप लगा कर मोनिटरिंग किये जाने वाले इस गांव को देखना एक दिलचस्प अनुभव है।

9. नाहरगढ़ दुर्ग:

  • नाहरगढ़ का किला अरावली की पहाड़ियों पर जयपुर को चारों ओर से घेर कर खड़ा है। इस किले को शहर की सुरक्षा के लिए बनवाया गया था।
  • इस किले से जुड़ी एक रोचक कहानी है। जब इस किले का निर्माण करवाया जा रहा था तब एक नाहरसिंह नामक युवक की प्रेतात्मा इसके निर्माण में बाधा डाल रही थी। उस समय तांत्रिकों ने सलाह दी कि किले का नाम प्रेतात्मा के नाम पर रखा जाए। इस तरह इस दुर्ग का नाम नाहरगढ़ दुर्ग पड़ा।
  • सवाई रामसिंह ने अपने शासनकाल में यहां अपनी नौ रानियों के लिए नौ अलग-अलग भवन बनवाये थे। इस किले से सूर्यास्त का दृश्य काफी सुंदर दिखाई देता है।

10. सिटी पैलेस:

  • यह इमारत शाही परिवार का निवास है। यह इमारत मुगल और राजस्थानी शैलियों से निर्मित है।
  • भूरे संगमरमर के खम्भों पर यह इमारत टिकी हुई है। भवन को मेहराबों और नक्काशियों से सुसज्जित किया गया है।
  • आज इसके एक हिस्से में संग्रहालय भी है।

जयपुर देश के सभी प्रमुख शहरों से परिवहन के सभी माध्यमों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहां साल भर कभी भी जाया जा सकता है। वैसे यहां जाने के लिए दीवाली के बाद का समय काफी सही होता है। जब भी जयपुर जाएं तो वहां की मेनस्ट्रीम जगहों के अलावा ऊपर दी गई ऑफबीट जगहों का भी जरूर लुत्फ़ उठा कर आये। यह आपके सफर में चार चांद लगा देगा।