महाभारत के काल से लेकर आज 4G के जमाने तक दिल्ली ने बहुत कुछ बदलते देखा है। भारत देश की राजधानी होने के इतर भी यह शहर अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस शहर को देखने आने वालों को यहां इतिहास से लेकर वर्तमान तक की यात्रा बयान करते कई पर्यटक स्थल नज़र आ जाएंगे। दिल्ली में लाल किला, इंडिया गेट, जामा मस्जिद, अक्षरधाम मंदिर, कुतुबमीनार, हुमायूं का मकबरा, लोटस टेम्पल, कालका मन्दिर जैसी अनेक प्रसिद्ध जगह हैं, जहां दिल्ली आने वाला हर पर्यटक जाता है। मगर इन सबके अलावा भी यह शहर अपने अंदर ऐसे कई स्थान समेटे हुए हैं, जो इस शहर में आने वाले पर्यटक को देखने चाहिए। जिससे कि दिल्ली के वजूद को समझा जा सके। आज हम ऐसी ही कुछ जगहों से आपको रूबरू करवाते हैं।

1. मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली:

शायरी के बेताज़ बादशाह मिर्ज़ा ग़ालिब की हवेली पुरानी दिल्ली की बल्लीमारान नामक गली में स्थित है। यहां आकर आपको हवेली की दीवारों में ग़ालिब की शायरियों की खुशबू महकती मिलेगी। ग़ालिब यहां नौ साल तक रहे थे। वर्तमान समय में यह राष्ट्रीय धरोहर है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक यहां जा सकते हैं। यहां कोई शुल्क नहीं लिया जाता। सोमवार को यह हवेली दर्शकों के लिए बंद रहती है। आप इश्क़ और ग़ालिब के फैन है तो एक बार यहां जरूर जाएं।

Mirza-Ghalib-Ki-Haveli
Mirza-Ghalib-Ki-Haveli (Source: Twitter)

2. तुगलकाबाद का किला:

तुगलकाबाद का किला दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में स्थित है। इसका निर्माण खिलजी शहंशाहों को परास्त करने वाले गयासुद्दीन तुगलक ने सन 1321 में करवाया था। यह दिल्ली का सबसे बड़ा किला है। इसकी दीवारों में तत्कालीन समय के अन्य किलों से अधिक मोटे पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। वर्तमान समय में इस किले का अधिकांश भाग खंडित हो चुका है।

तुगलकाबाद का किला
तुगलकाबाद का किला (Source: DelhiPedia)

3. मजनू का टीला:

मजनू के टीले को हम “मिनी तिब्बत” कह सकते हैं। यहां तिब्बतियों द्वारा बसाई गई कॉलोनियाँ हैं। यहां रेस्टोरेंट और मार्केट में हर जगह आपको तिब्बती रंग चढ़ा हुआ नजर आएगा। यहां एक मंदिर भी है, जहां बौद्ध भिक्षु प्रार्थना करते नज़र आ जाते हैं। घरों की बसावट, दुकानों की साज-सज्जा, स्थानीय तिब्बती रहवासियों को देख कर आपको लगेगा ही नहीं कि आप दिल्ली में हैं। मजनू के टीले पर ऐतिहासिक महत्व का एक सिख गुरुद्वारा भी है। इस तरह हम कह सकते हैं, मजनू का टीला जाना अच्छा अनुभव हो सकता है।

मजनू का टीला

4. ओखला बर्ड सैंक्चुरी:

यह सैंक्चुरी दिल्ली-उत्तरप्रदेश राज्यसीमा पर यमुना किनारे स्थित है। यहां पक्षियों की 400 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती है। सैंकड़ों तरह के पेड़-पौधों की प्रजातियां यहां देखने को मिलती हैं। कभी-कभी यहां नीलगाय, जैकॉल भी देखने को मिल जाते हैं। यह बर्ड सैंक्चुरी सप्ताह के सभी दिन खुली रहती है। यहां सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक घूम सकते हैं।

ओखला बर्ड सैंक्चुरी

5. चंपा गली:

साकेत मेट्रो स्टेशन के नज़दीक स्थित सैदुलाजाब गांव में स्थित है, चंपा गली। यह गांव अब पूरी तरह शहरी रूप ले चुका है। प्रसिद्ध पर्यटक स्थल “गार्डन ऑफ फाइव सेंसेस” के रास्ते में यह गली स्थित है। यहां अनोखे तरीके से बने म्यूजिक स्टोर्स, कैफे, बुक लॉज है। खास कर पर्शियन लुक आपको यहां के रेस्टोरेंटस में देखने को मिलेगा। युवाओं में यह गली काफी फेमस है। खास कर सोशल मीडिया लवर्स के यह एक शानदार डेस्टिनेशन है। यह एक इंस्टा पॉइंट जैसा है। कुछ लोग यहां सुंदर तस्वीरें खींचने आते हैं तो कुछ किताबों और कैफ़े के लिए। यहां जाना एक चिलिंग एक्सपीरियंस रहता है।

6. संजय वन:

दिल्ली में संजय वन के इलाके की घनी हरियाली और शांति से यह जगह आपको पार्क कम और एक घना जंगल ज्यादा लगेगा। इस जगह को लेकर कई तरह की कहानियां भी प्रचलित हैं। इसे दिल्ली के हॉन्टेड प्लेसेस में शामिल किया जाता है। शाम के बाद अक्सर यहां लोग नहीं जाते हैं। यहां जाना एक रोमांचकारी अनुभव होता है।

7. जहाज महल:

जहाज महल दिल्ली की गुमनाम विरासतों में से एक है। यह महरौली के हौज-ए-शम्सी में स्थित है। इसके चारों तरफ के वातावरण को देखने पर इसका प्रतिबिम्ब ऐसे मालूम होता है जैसे किसी झील में कोई जहाज तैर रहा हो। इसका निर्माण लोदी शासनकाल के दौरान हुआ था। यह बलुआ पत्थर से निर्मित शानदार इमारत है। यहां “फूलवालों की सैर कार्यक्रम’ का भी सालाना आयोजन होता है।

जहाज महल

8. सतपुला ब्रिज:

सतपुला ब्रिज नाम से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सात नम्बर से इसका कोई रिश्ता है। जी हां, सतपुला ब्रिज का निर्माण 7 ब्रिजों को जोड़ कर किया गया है। यह मालवीय नगर में स्थित है। सुल्तान मुहम्मद शाह तुगलक ने इसका निर्माण करवाया था। यहां आप प्राचीन जमाने में किस तरह जल संरक्षण के तरीके अपनाए जाते थे यह समझ सकते हैं।

9. आधम खान का मकबरा:

यह इमारत मुगलिया शासन के दौरान 16वीं सदी में बनवाई गई थी। इस मकबरे में शहंशाह अकबर के एक बहादुर सिपहसालार आधम खान को दफनाया गया है। आधम खान अकबर की धाय मां महम अनघा का छोटा बेटा था। आधम खान का मकबरा दिल्ली के महरौली इलाके में स्थित है।

आधम खान का मकबरा

10. अग्रसेन की बावली:

यह कनॉट प्लेस के पास हेली रोड़ पर स्थित है। यह एक पुरातात्विक स्थल है। इस बावड़ी की ऐतिहासिकता की वजह से इसे संरक्षित पुरातात्विक स्थल का दर्जा दिया गया है। भारत सरकार ने इस बावड़ी पर डाक भी जारी किया है।14वीं सदी में महाराजा अग्रसेन ने इसका निर्माण करवाया था। इसका निर्माण लाल बलुए पत्थरों द्वारा करवाया गया है। यह बावड़ी 60 मीटर लम्बी और 15 मीटर ऊंची है।

अग्रसेन की बावली

11. नेशनल वार मेमोरियल:

आज़ादी के बाद अलग-अलग लड़ाइयों में शहीद हुए देश के हज़ारों बहादुर सिपाहियों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए इंडिया गेट के पास 40 एकड़ में नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया गया है। यहां ग्राफिक पैनल, भित्ति चित्र, शहीदों के नाम और 21 परमवीर चक्र विजेताओं की मूर्तियां भी लगाई गई हैं। यह मेमोरियल सातों दिन खुला रहता है। यहां प्रवेश भी निःशुल्क रखा गया है। यहां का भ्रमण आपको देश के लिए मर मिटने वाले जवानों की भावनाओं के करीब पहुंचा देगा।