दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग की समस्या तेजी से बढ़ रही है जिसके कारण कई तरह की बीमारियां भी बढ़ती जा रही हैं। यहां की जहरीली हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है। रिसर्च के अनुसार स्मॉग की तीव्रता तेज गति से बढ़ रही है जो पिछले कुछ सालों में अब तक की सबसे खतरनाक स्थिति में पहुंच गयी है।

सरकार की तरफ से स्मॉग से निपटने के कई उपाय किए जा रहे हैं और इसे नियंत्रित करने के लिए ऑड- इवेन सहित कई योजनाएं भी चलायी जा रही हैं। फिर भी स्मॉग का स्तर नहीं घट रहा है। आइये जानते हैं स्मॉग क्या है, कैसे होता है, इससे किस तरह की बीमारियां होती हैं और इनसे बचने के घरेलू उपाय क्या हैं।

Smog

क्या है स्मॉग? (What is smog?)

वातावरण में मौजूद हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायन जब सूर्य के प्रकाश के साथ मिलकर क्रिया करते हैं तब स्मॉग की समस्या उत्पन्न होती है। सर्दियों में होने वाले स्मॉग को फोटोकेमिकल स्मॉग कहा जाता है। यह आमतौर पर उद्योग धंधों और कारखानों से निकलने वाली गैसों और वाहनों के धुंओं के कारण होता है।

स्मॉग दो शब्दों स्मोक यानि धुंआं और फॉग अर्थात् कोहरे (Smoke+Fog) से मिलकर बना है। स्मॉग के कारण आसमान में काला और पीला धुंध छा जाता है जिसमें सांस लेने में कठिनाई होती है। सांस से जुड़ी बीमारियों वाले मरीजों के लिए यह प्रदूषण बहुत ही घातक है।

स्मॉग के कारण (Causes of smog)

स्मॉग कई कारणों से होता है। पर्यावरण में कई तरह के प्रदूषक मौजूद होते हैं जो स्मॉग उत्पन्न करते हैं। स्मॉग के कुछ मुख्य कारण निम्न हैं।

  • दिल्ली एनसीआर की सीमाओं से लगे पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसान फसल कटने के बाद भारी मात्रा में अवशेषों (पराली) को जलाते हैं जो इस स्मॉग का सबसे प्रमुख कारण है।
  • वाहनों से निकलने वाले धुएं में नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसी जहरीली गैसें होती हैं जिसके कारण स्मॉग उत्पन्न होता है।
  • दिल्ली में भारी मात्रा में पटाखे जलाए जाते हैं जिनके धुएं से स्मॉग की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए हर साल दिवाली के समय यह समस्या और बढ़ जाती है।
  • राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़े बड़े कारखानों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण वायु प्रदूषण बढ़ने से आसमान में धुंध छा जाता है।
  • अधिक मात्रा में कोयला जलने के कारण भी कई गैसें निकलती हैं जिससे स्मॉग की समस्या बढ़ जाती है।
  • ऑटोमोबाइल, पावर प्लांट, आतिशबाजी, पेंट, हेयरस्प्रे और चारकोल से निकलने वाली गैसों से भी स्मॉग की समस्या उत्पन्न होती है।

स्मॉग से होने वाली बीमारियां या समस्याएं (Diseases due to smog)

वायु प्रदूषण से स्मॉग की समस्या तेजी से बढ़ती है। यह सिर्फ वातावरण के लिए ही नुकसानदायक नहीं होता बल्कि सेहत को भी प्रभावित करता है। स्मॉग के कारण लोगों को कई बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

  • स्मॉग से व्यक्ति को अस्थमा, एम्फीसिमा, ब्रोंकाइटिस और श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • स्मॉग के कारण व्यक्ति के आंखों में जलन और फेफड़ों में इंफेक्शन हो सकता है।
  • सांस लेते समय स्मॉग वायुमार्ग को बाधित कर देता है जिससे हृदय और फेफड़ों में तनाव होता है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई सही तरीके से नहीं हो पाती है और हृदय एवं फेफड़े से जुड़ी बीमारियां उत्पन्न हो जाती है।
  • स्मॉग के कारण श्वसन प्रणाली की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं जिससे व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है।
  • स्मॉग फेफड़ों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है जिससे फेफड़े की क्षमता और कार्य दोनों कम हो जाता है।
  • स्मॉग में कई खतरनाक गैसों की परतें होती है जो गर्भवती महिलाओं को प्रभावित कर सकती है। इससे गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंच सकता है और उसका वजन कम हो सकता है।
  • घंटों तक आउटडोर एक्सरसाइज करने वाले एथलीट भी स्मॉग से प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण उनकी प्रदर्शन क्षमता पर असर पड़ता है।
  • गले में खराश, घरघराहट, सीने में दर्द, मितली, आंखों में जलन और सिरदर्द स्मॉग से होने वाली मुख्य समस्याएं हैं। इसके अलावा कमजोरी और थकान की समस्या भी हो सकती है।
  • स्मॉग से बाल झड़ सकता है, आंखों में एलर्जी, त्वचा संबंधी रोग, इम्यून सिस्टम में कमजोरी, ब्रेन स्ट्रोक और ब्लड कैंसर का भी खतरा हो सकता है।
  • स्मॉग के संपर्क में बहुत ज्यादा देर तक रहने से बच्चों की हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इससे उन्हें रिकेट्स हो सकता है।

स्मॉग या प्रदूषण में घर से बाहर जाते समय क्या सावधानियां बरतें (Precautions to Stay Safe in Smog)

स्मॉग के प्रभाव से काफी हद तक बचा जा सकता है। हालांकि इसके लिए कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। घर से बाहर निकलें तो एहतिहात बरतें और स्मॉग से अपने को सुरक्षित रखें।

  • स्मॉग से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करें। मेडिकल स्टोर या बाजार से अच्छी क्वालिटी का N95 या N99 फिल्टर वाला मास्क खरीदें। अगर आपके पास मास्क न हो तो कॉटन के कपड़े से मुंह और नाक को ढक कर बाहर निकलें।
  • खुले वाहन जैसे बाइक, स्कूटी और ऑटो से यात्रा ना करें। अगर लंबी दूरी तय करनी हो तो मेट्रो या बस से यात्रा करें। संभव हो तो कार से यात्रा ना करें। इससे आप स्मॉग के प्रभाव से बच सकते हैं।
  • स्मॉग से खुद को सुरक्षित रखने के लिए अधिक मात्रा में पानी पीएं। पानी शरीर को डिटॉक्स करता है और वायु प्रदूषकों को शरीर से बाहर निकालता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में जूस, पानी और अन्य पेय पदार्थों का सेवन करें। इसके अलावा संतुलित आहार लें और अपनी डाइट में शहद और तुलसी के पत्ते का उपयोग करें। ये इम्यून सिस्टम को बढ़ाते हैं और स्मॉग के असर से बचाने में मदद करते हैं।
  • स्मॉग बढ़ने पर कारखानों और कंस्ट्रक्शन साइट पर ना जाएं। इन स्थानों पर जाने से पहले नाक और मुंह को मास्क से ढक लें ताकि धूल के कण शरीर के अंदर प्रवेश ना करें।

कब जाएं डॉक्टर के पास?

  • यदि आंखों में कई दिनों से लगातार जलन बनी हो।
  • 3-4 दिनों से ज्यादा समय तक गले में घरघराहट, खराश और सिर दर्द हो।
  • सांस लेने में ज्यादा तकलीफ महसूस हो और बार बार खांसी आए।
  • मिचली आए और कई बार उल्टी होने लगे।

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स्मॉग के दौरान बचाव के घरेलू इलाज (Home Remedies to Protect yourself from Smog)

स्मॉग के प्रभाव से बचने के लिए आप घरेलू उपायों की मदद ले सकते हैं। कई डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप इस मौसम में शुरू से ही इन घरेलू उपायों को अपनाएं तो आप इन बीमारियों से बच सकते हैं।

a) गुड़ का सेवन:

स्मॉग से बचने के लिए रोजाना गुड़ का सेवन करें। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों और धूल के कणों को निकालने में मदद करता है। गुड़ में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं और इसे नैचुरल डिटॉक्स माना जाता है। यह ब्लडस्ट्रीम, फेफड़े और भोजन नली से हानिकारक तत्वों को निकालता है जिसके कारण स्मॉग का असर कम हो जाता है।

b) अदरक और घी का लड्डू:

बाहर से घर लौटने के बाद अदरक और घी का लड्डू खाना फायदेमंद होता है। यह स्मॉग के कारण उत्पन्न हुए संक्रमण और सूजन को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। यह ध्यान रखें कि शुद्ध देशी घी में ही बना अदरक और गुड़ का लड्डू खाएं।

c) दूध, केसर और हल्दी:

स्मॉग से बचने के लिए दूध, केसर, हल्दी और तुलसी के बीज का सेवन लाभकारी होता है। तुलसी का बीज इंफेक्शन, एलर्जी और सूजन को दूर करता है। जबकि हल्दी में एंटी इंफ्लैमेटरी गुण पाये जाने के कारण यह सुस्ती और कमजोरी को दूर करने में सहायक होती है। केसर स्किन और हेयर डैमेज को रोकता है। दूध में केसर और हल्दी मिलाकर गर्म करें और इसमें एक चम्मच तुलसी का बीज मिलाकर रोजाना सेवन करें। इससे स्मॉग के कारण शरीर में उत्पन्न विभिन्न समस्याओं से बचा जा सकता है।

d) मसाज करें:

स्मॉग और वायु प्रदूषण से बचने के लिए रोजाना गुनगुने तेल से मालिस करना फायदेमंद होता है। यह मस्तिष्क और शरीर को रिचार्ज करता है और एनर्जी पैदा करता है जिससे शरीर की सुस्ती, आलस और कमजोरी दूर होती है। स्मॉग के दौरान नियमित रुप से किसी अच्छे तेल से बॉडी मसाज करना चाहिए।

e) घी:

डॉक्टरों का मानना है कि रोजाना सुबह और रात में सोने से पहले नाक में एक या दो बूंद घी डालने से धूल के कण और प्रदूषक बाहर निकल आते हैं और नाक साफ हो जाती है। इसके अलावा घर में बना शुद्ध घी नियमित रुप से भोजन में इस्तेमाल करने से यह लेड और मरकरी जैसे प्रदूषकों के प्रभाव को कम करता है और हड्डियों, किडनी और लिवर को डैमेज होने से बचाता है।

f) नीम:

नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर इससे त्वचा और बाल धोने से त्वचा और म्यूकस झिल्ली में जमा प्रदूषक बाहर निकल जाते हैं। वास्तव में नीम में कई ऐसे तत्व पाये जाते हैं जो प्रदूषकों को नष्ट कर देते हैं और स्मॉग के प्रभाव को कम करते हैं। अगर संभव हो तो रोजाना तीन से चार नीम की पत्तियां चबाएं। यह ब्लड और लिम्फैटिक टिशू को प्यूरिफाई करता है। जिससे स्मॉग के कारण होने वाली बीमारियों से छुटकारा मिलता है।