उच्च रक्तचाप आमतौर पर जीवनशैली से जुड़ी समस्या है जिससे ज्यादातर लोग पीड़ित हैं। आम बोलचाल में लोग इसे हाई ब्लड प्रेशर या बीपी की समस्या कहते हैं। खराब खानपान, अधिक धूम्रपान और शराब के सेवन सहित रोजमर्रा के अन्य गलत आदतों से ही यह समस्या उत्पन्न होती है। यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है।
हालांकि इसके शुरूआती लक्षण नहीं दिखायी देते हैं लेकिन समय समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराते रहने से बहुत जल्द ही इसका निदान हो जाता है। आइये जानते हैं उच्च रक्तचाप क्या है, इसके कारण, लक्षण और इलाज क्या हैं।

1. उच्च रक्तचाप / हाई ब्लड प्रेशर क्या है? (What is High Blood Pressure)

उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंश एक ऐसी स्थिति है जिसमें धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। दबाव बढ़ने के कारण धमनियों में रक्त के प्रवाह को बनाए रखने के लिए हृदय को अधिक कार्य करना पड़ता है। हृदय जितना अधिक रक्त को पंप करता है, धमनियां उतनी ही संकरी होती जाती हैं और रक्तचाप भी उतना ही ज्यादा बढ़ता है।
इसकी वजह से हृदय रोग, स्ट्रोक एवं अन्य गंभीर बीमारियां हो जाती हैं। हालांकि सालों तक उच्च रक्तचाप के लक्षण नहीं दिखायी देते हैं। सामान्य स्थित में रक्त प्रवाह 120/80 से 140/90 mmHg के बीच रहता है, लेकिन जैसे ही
रक्तचाप इससे अधिक हो जाता है व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीड़ित हो जाता है।

2. उच्च रक्तचाप / हाइपरटेंशन / हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण (Symptoms of Hypertension)

ज्यादातर लोगों में शुरूआत में उच्च रक्तचाप के कोई भी लक्षण नहीं दिखायी देते हैं लेकिन यह चुपचाप शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। कई साल या दशकों बार उच्च रक्तचाप के लक्षण स्पष्ट दिखायी देने लगते हैं। इन लक्षणों से पहचाना जा सकता है कि व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीड़ित है।

ब्लड प्रेशर के 7 लक्षण
  • सिर दर्द
  • सांस लेने में परेशानी
  • नाक से खून निकलना
  • चक्कर आना
  • सीने में दर्द
  • आंखों की रोशनी कमजोर होना
  • पेशाब में खून आना

ये लक्षण दिखायी देने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। आमतौर पर किसी भी व्यक्ति में उच्च रक्तचाप के ये सभी लक्षण नहीं दिखायी देते हैं। लेकिन कोई भी एक लक्षण दिखायी देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है।

3. हाइपरटेंशन / हाई ब्लड प्रेशर के प्रकार (Types of Hypertension)

हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप दो प्रकार का होता है।

A. प्राइमरी हाइपरटेंशन:

यह हाइपरटेंशन आमतौर पर वयस्कों में होता है और इसके सटीक कारणों का पता नहीं चल पाता है। रिसर्च में पाया गया है कि प्राथमिक हाइपरटेंशन काफी धीमा गति से कई वर्षों में विकसित होता है तब जाकर व्यक्ति को इसका पता चल पाता है।

B. सेकेंडरी हाइपरटेंशन:

कुछ लोगों को विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उच्च रक्तचाप होता है। इसे सेकेंडरी हाइपरटेंशन कहते हैं। यह बहुत तेजी से विकसित होता है और प्राइमरी हाइपरटेंशन की अपेक्षा काफी गंभीर होता है।

4. उच्च रक्तचाप / हाई ब्लड प्रेशर के कारण (Causes of High Blood Pressure)

हाइपरटेंशन आमतौर पर कई कारणों से होता है।

  • किडनी में समस्या
  • एड्रिनल ग्लैंड ट्यूमर
  • थायरॉयड
  • स्लिप एप्निया
  • रक्तवाहिकाओं में जन्मजात दोष
  • बर्थ कंट्रोल पिल्स
  • एंडोक्राइन ट्यूमर
  • धूम्रपान और शराब का सेवन
  • मोटापा
  • भोजन में अधिक नमक का सेवन
  • आनुवांशिकता
  • एक्सरसाइज न करना
  • बढ़ती उम्र

इन सभी कारणों में से किसी भी कारण से किसी भी व्यक्ति को उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है। इसके अलावा शारीरिक बदलाव, पर्यावरण, तनाव, हार्मोन में परिवर्तन एवं गर्भावस्था के कारण भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।

5. उच्च रक्तचाप / हाई ब्लड प्रेशर का निदान (Treatment of High Blood Pressure)

हाइपरटेंशन के निदान के लिए ब्लड प्रेशर रीडिंग ली जाती है। रक्तचाप बढ़ने पर ज्यादातर डॉक्टर हफ्ते में कई बार बुलाकर रीडिंग लेते हैं। आमतौर पर एक ही रीडिंग में उच्च रक्तचाप का निदान हो जाता है। वैसे तो ब्लड प्रेशर का लेवल पूरे दिन बदलता रहता है लेकिन अगर आपका रक्तचाप हाई बना हुआ है तो डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।

  • यूरीन टेस्ट
  • कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग एवं ब्लड टेस्ट
  • ईसीजी और ईकेजी
  • हृदय और गुर्दे का अल्ट्रासाउंड

ये सभी टेस्ट बढ़े हुए रक्तचाप की पहचान करने में मदद करते हैं। इसके अलावा टेस्ट के माध्यम से आपके अंगों पर उच्च रक्तचाप के प्रभाव का भी पता लगाया जाता है। निदान होने के बाद ही आपको उच्च रक्तचाप का उचित इलाज बताया जाता है।

6. ऐसे समझें ब्लड प्रेशर रीडिंग (How to understand BP Reading)

ब्लड प्रेशर रीडिंग
How to understand BP Reading

ब्लड प्रेशर रीडिंग पर दो नंबर होते हैं।

सिस्टोलिक प्रेशर:
सबसे पहला नंबर सिस्टोलिक प्रेशर को दर्शाता है। जब हृदय की धड़कनें चलती हैं और यह रक्त को पंप करता है तो यह आपकी धमनियों में प्रेशर को बताता है।

डायस्टोलिक प्रेशर:
दूसरा नंबर डायस्टोलिक प्रेशर को दर्शाता है। यह हृदय की धड़कनों के बीच धमनियों में दबाव को इंगित करता है।

वयस्कों में पांच तरीके से ब्लड प्रेशर की रीडिंग देखी जाती है।

a. सामान्य रक्तचाप:
हेल्दी ब्लड प्रेशर रीडिंग पारे पर 120/80 mmHg से कम होती है।

b. बढ़ा हुआ रक्तचाप:
अगर सिस्टोलिक नंबर 120 से 129 mmHg के बीच और डायस्टोलिक प्रेशर 80 mmHg से कम हो तो आपका रक्तचाप बढ़ा हुआ है। रक्तचाप बढ़ने पर डॉक्टर आमतौर पर दवाओं का सेवन करने के बजाय जीवनशैली में बदलाव करने की सलाह देते हैं।

c. स्टेज 1 हाइपरटेंशन:
इसमें सिस्टोलिक नंबर 130 से 139 mmHg के बीच और डायस्टोलिक नंबर 80 से 89 mmHg के बीच होता है।

d. स्टेज 2 हाइपरटेंशन:
दूसरे चरण में सिस्टोलिक नंबर 140 mmHg या इससे अधिक और डायस्टोलिक नंबर 90 mmHg या इससे अधिक होता है।

e. हाइपरटेंशन का गंभीर चरण:
इस चरण में सिस्टोलिक नंबर 180 mmHg से अधिक और डायस्टोलिक नंबर 120 mmHg से अधिक होता है। इस स्थिति में तुरंत इलाज कराने की जरूरत पड़ती है। यदि इस दौरान छाती में दर्द, सिर दर्द, सांस लेने में तकलीफ और आंखों से धुंधला दिखायी दे तो आपका रक्तचाप बहुत ज्यादा बढ़ गया है और व्यक्ति को आपातकालीन कक्ष में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है।

7. उच्च रक्तचाप / हाई ब्लड प्रेशर 5 घरेलू इलाज (5 Home Remedies for High Blood Pressure)

भोजन में नमक की मात्रा घटाने सहित उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए अन्य कई उपाय मौजूद हैं। कुछ घरेलू उपायों से भी हाई ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आंवला:
आंवले में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है। एक गिलास पानी में दो चम्मच आंवले का रस मिलाकर रोजाना खाली पेट पीने से रक्तचाप नहीं बढ़ता है।

लहसुन:
लहसुन का सेवन करने से हृदय से जुड़ी सभी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। यह सल्फर से समृद्ध होता है और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायता करता है। रोजाना दिन में दो बार लहसुन के पेस्ट में शहद मिलाकर सेवन करें। इसके अलावा भोजन में भी लहसुन का उपयोग करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है।

नारियल पानी:
नारियल पानी में पर्याप्त मात्रा में मिनरल एवं अन्य तत्व मौजूद होते हैं जो धमनियों में सही तरीके से रक्त प्रवाहित होने में मदद करते हैं। नारियल पानी में मौजूद पोटैशियम रक्त में सोडियम के लेवल को संतुलित करता है और बढ़े हुए रक्तचाप को कम करता है। इसलिए नियमित सुबह नारियल पानी का सेवन करना चाहिए।

दालचीनी:
इसमें पॉलीफेनॉल, एंटीऑक्सीडेंट और सिनामाल्डेहाइड व सिनेमिक एसिड जैसे अन्य कई तत्व पाये जाते हैं। जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। रोजाना सुबह एक गिलास गर्म पानी के साथ एक चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर का सेवन करने से ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता है।

व्यायाम:
हफ्ते में कम से कम पांच तीन आधे घंटे तक टहलने, जॉगिंग, साइक्लिंग या स्वीमिंग करने के अलावा अन्य एक्सरसाइज करने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय से जुड़ी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। एरोबिक एक्ससाइज भी काफी फायदेमंद है।