आई.टी फ्रोफेशनल द्वारा झेली जा रही हेल्थ समस्या और उनके उपाय

आई.टी क्षेत्र यानि इनफॉमेशन टेक्नोलॉजी की दुनिया, एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें आपका अधिकांश समय कंप्यूटर स्क्रीन पर ही व्यतीत होता है। यब सेक्टर विश्व के सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से तो है ही, साथ ही इस क्षेत्र ने युवाओं को अच्छा रोजगार भी प्रदान किया है।

इस क्षेत्र की हमारे समाज में भी अहम भूमिका रही है। आज जितने भी हम मोबाइल, कंप्यूटर, हाइ-टेक डिवाइस, अत्याधुनिक मेडिकल उपकरण आदि का प्रयोग कर रहे हैं उन सभी को तैयार करने में आई.टी प्रोफेशनल की कड़ी मेहनत रही है। आज भारत तकनीक के मामले में दूसरे देशों को टक्कर दे रहा है, साथ ही चौबींसो घंटे चलने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी इन्हीं के दम पर टिकी हैं।

हाल ही में लॉन्च हुआ चंद्रयान-2 इसी आई.टी क्षेत्र के प्रोफेशनल्स की मदद से तैयार किया गया। आई.टी क्षेत्र में काम कर रहे प्रोफेशनल्स ने हमारी ज़िंदगी को तो आसान बनाया है, लेकिन इस क्षेत्र की कठिनाइयों के चलते उन्हें अपने स्वास्थ्य के साथ भी समझौता करना पड़ा है। जानते हैं किस प्रकार की दिक्कतों का सामना करते हैं आई.टी प्रोफेशनल।

A. आंखों की समस्या:

  • कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने वाला हर व्यक्ति जानता है कि स्क्रीन पर ज़्यादा समय काम करने से उसकी आंखों में विकार पैदा होते है। जैसे नज़रों का कम हो जाना, आंखों में सूखापन, आंखों में जलन होना आदि। इनसे बचने के लिए सबसे पहले आप कंप्यूटर स्क्रीन से फासला बना कर बैठें, न स्क्रीन के ज़्यादा नज़दीक न ज़्यादा दूर।
  • कंप्यूटर स्क्रीन अल्ट्रा वॉयलेट यानि यूवी किरणें पैदा करती है जो आंखों के लिए नुकसानदेह होती है, इनसे बचने के लिए खास चश्मा आता है उसका प्रयोग करें।यदि आपकी नज़र पहले से ही कमज़ोर है तो हमेशा चश्मा पहन कर ही कंप्यूटर पर काम करें।
  • आंखों में सूखापन और जलन महसूस होने जैसी समस्या से बचने के लिए स्क्रीन पर लगातार घंटों नज़रे गढ़ाएं न बैठें।
  • काम करते समय हमेशा अपनी पलकों को झपकते रहें। साथ ही समय-समय पर आंखों पर ठंडे पानी की छींटे मारें। इसके अलवा किसी नेत्र विषेज्ञक से बात कर नेत्रों के लिए आई ड्रॉप लिखवा लें और उसका प्रयोग करें।

B. पीठ व गर्दन में दर्द:

  • लगातार कुर्सी पर बैठकर घंटों तक काम करने से पीठ दर्द होना वाजिब समस्या है। इस समस्या से निजात पाने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि सबसे पहले अपने आराम अनुसार आरामदेह कुर्सी लें और उसकर सही मुद्रा में बैठे।
  • अकसर लोग कुर्सी पर लेट जाते है या इस प्रकार बैठते हैं कि उनकी रीढ़ की हड्डी सीधी नहीं रहती हैं जिसके कारण दर्द होता है। रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठने से पीठ दर्द की समस्या को आप दूर कर सकेंगे।
  • कुर्सी पर बैठते समय ध्यान दें कि आपका सिर कुर्सी के पिछले भाग को छूएं और गर्दन सीधी रखें जिससे गर्दन में दर्द जैसी समस्या का सामना न हो।

C. विटामिन-डी की कमी:

  • इस समस्या की वजह है कि इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के आहार में विटामिन-डी की मात्रा कम है और वह सूर्य की किरणों के भी संपर्क में नहीं आ रहे जिससे उन्हें प्राकृतिक तौर पर विटामिन-डी नहीं मिल रहा।
  • जब आप दिन में 9 घंटे ऑफिस में व्यतीत करते हैं तो जाहिर है कि आप सूर्य की किरणों को पर्याप्त रूप से नहीं ले सकेंगे। साथ ही आहार में भी यदि विटामिन-डी कम है तो भी यह परेशानी देखने को मिलेगी।
  • विटामिन-डी हमारी हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है, लेकिन शरीर में इसकी कमी होने के कारण हड्डियां कमज़ोर हो सकती है।
  • इसका उपाय है कि आप समय निकाल कर सूर्य की किरणों के संपर्क में आएं, आहार में इसकी मात्रा बढ़ाए या फिर डॉक्टर से बात कर इसकी टैबलेट का सेवन करें।

D. सिरदर्द:

  • सिरदर्द की बात करें तो इस क्षेत्र में काम करने वालों को लगातार अपने कार्य में प्रेशर का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उन्हें सरदर्द हो सकता है। एक आम व्यक्ति पर भी वर्क प्रेशर डाला जाए तो वह भी सिरदर्द से ग्रसित हो सकता है।
  • इससे बचने के लिए आप लगातार काम ना करें, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर बाद अपने काम से ध्यान को हटा लें और थोड़ा रेस्ट लें, जिससे दिमाग को आराम मिलेगा।
  • इस दौरान आप अपने साथी से बात कर सकते हैं, थोड़ा टहल सकते हैं या परिजनों से बात कर सकते हैं। यह सब करने से आपका मूड रिफ्रेश होगा और सरदर्द होने की संभावना कम हो जाएगी।

E. भार का बढ़ना और आलस्य:

  • कई लोग अपने कंप्यूटर पर लगातार कई घंटों तक काम करते रहते हैं, वह सोचते है कि एक बार पूरी तरह काम को पूरा करने के बाद ही उठें। इस दौरान वह अपना लंच भी अपनी डेस्क पर करते हैं और जो लोग फास्ट फूड मंगवाते वह तो पहले ही नुकसानदेह है।
  • कहा जाता है कि खाना खाने के बाद आप थोड़ा टहलें पर जो लोग ऐसा नहीं करते उनके साथ भार बढ़ने की समस्या आने लगती है। यहां तक की वह अपने छोटे-मोटे काम भी औरों से कराने लगते हैं जिससे आलस्य पैदा होता है। जैसे-जैसे भार बढ़ता है आलस्य उतपन्न होता जाता है।
  • बेहतर है कि आप ऑफिस में थोड़ा फिजिकल वर्क करते रहें। जैसे लिफ्ट के बदले सीढ़िया चढ़ना, किसी दिन मेट्रो से उतरने के बाद ऑफिस ऑटो की जगह पैदल जाना, खाना खाने के बाद टहलना जिससे आपका भार नहीं बढ़ेगा और आपमें आलस्य भी पैदा नहीं होगा।

उम्मीद है कि इस सब छोटे-छोटे साधारण से उपायों को अपना कर आप खुद को गंभीर बीमारियों से बचा लेंगे और देश के हित में इसी तरह निहित होकर अपना योगदान देते रहेंगे।