भागदौड़ भरी नौकरीपेशा ज़िंदगी में हर कोई ज़्यादा से ज़्यादा समय बचाना चाहता है। इसी समय की बचत करने के लिए लोगों ने अपनी जीवनशैली में बदलाव कर लिएं हैं। इन बदलावों में व्यायाम से लेकर खानपान की बदलती आदतें शामिल है। एक आम नौकरीपेशा व्यक्ति की ज़िंदगी में व्यायाम आपको देखने को नहीं मिलेगा, जिसका सीधा असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ता है। उसी तरह खानपान में भी किए जा रहे बदलाव से भी लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। लोगों की इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है फास्ट फूड या कहें जंक फूड। लोगों की ज़िंदगी में इसके शामिल होने की वजह है स्वाद और बनाने के समय से मुक्ति। फूड डिलिवरी ऐप लोगों के फोन में एक आम ऐप्लीकेशन बन गया है और यह पेशा एक अच्छा रोजगार। अकसर हम अपने विकास को अमरीका से जोड़कर देखते हैं। एक सर्वे के मुताबिक अमरीका में सलाना 160 बिलियन डॉलर फास्ट फूड चैन में खर्च होता है जबकि 620 बिलियन डॉलर स्नैक्स और कैंडी जैसे पैकेटबंद उत्पादों में। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत में आंकड़े क्या कहते होंगे। फास्ट फूड में पिज्जा, बर्गर, चिप्स, फ्रेंच फ्राई, चिल्ली पोटेटो, समोसा, कचौड़ी, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक, आईस क्रीम आदि। इन्हें फास्ट फूड इनकी उपलब्धता की आसानी की वजह से कहा जाता है, लेकिन जंक फूड क्यों कहते हैं ये अब हम आपको बताते हैं।

क्यों कहलाए जाते हैं जंक फूड

अंग्रज़ी के शब्द ‘जंक’ को हिन्दी में कचरा कहते हैं। पर क्या वाकई पेट की भूख मिटाने वाली चीज़ कचरा है। जी हां, इस प्रकार के खाने से आपका पेट को भर सकता है पर ये पौष्टिक नहीं होते। इनको बनाने की प्रक्रिया की काफी हद तक सेहत से लिए नुकसानदेह है। जंक फूड में आपको भारी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट (केलोरी) और फैट मौजूद हैं, इसके अलावा न तो आपकी पाचन क्रिया में मदद करने के लिए फाइबर, विटामिन या मिनरल नहीं मिलते। केवल केलोरी, सोडियम और वसा मिलने के कारण ही इन्हें जंक फूड कहा जाता है, क्योंकि ये आपके शरीर को कोई पौष्टिक तत्व नहीं देते हैं।

किस प्रकार तैयार किया जाता है फास्ट फूड

फास्ट फूड को तैयार करने में केमिकल फ्लेवर, प्रेजरवेटिव, प्रोसेस्ड फूड आईटम, कई बार इस्तेमाल किया गया गंदा तेल इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। हर फास्ट फूड चैन में उपलब्ध होने वाले फूड आईटम प्रोसेस्ड सामग्री से बनते हैं। इस प्रकार की सामग्री को इस लिए तैयार किया जाता है ताकि यह ज्यादा दिन तक सुरक्षित बनी रहे और जब चाहे इस्तेमाल की जा सके। लेकिन फास्ट फूड को बनाने की प्रक्रिया में केमिकल का प्रयोग किया गया होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हर हाल में हानिकारक है।
फूड चैन में फास्ट फूड आईटम को तैयार करने के बाद सीधा सर्व किया जाता है जैसे बर्गर, पिज़्ज़ा, फ्रेंच फ्राई, हॉट डॉग, नाचो इत्यादि। इन्हें सर्व करने के दौरान इनमें प्रिजरवेटिव नहीं मिलाया गया होता है।
वहीं दूसरी और स्नैक्स जैसे कैंडी, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, नमकीन, बिस्किट आदि में प्रिजरवेटिव का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह दुकानों पर बेचे जाते हैं। अब कोई उत्पाद कितने दिनों में बिकेगा इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसलिए शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए प्रिजरवेटिव का प्रयोग किया जाता है।
अब बात करते है उस प्रक्रिया की जो इन प्रोडक्ट्स को ज्यादा हानिकारक बनाती है, वो है तेल में तला जाना। तेल में तले जाने से प्रोडक्ट के पौष्टिक तत्व तो खत्म होते ही हैं, साथ ही उसमें अधिक मात्रा में ट्रांस फैट जमा हो जाता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक है। तेल में तलते समय कभी शैलो फ्राई किया जाता है तो कभी डीप फ्राई किया जाता है। फ्राई की हुई कोई भी चीज़ हमारे हृदय के स्वास्थ के लिए ठीक नहीं है। फ्राई की हुई चीज़ों में अधिक मात्रा में बैड कॉलेस्ट्रॉल होता है, जो हमारी हृदय की धमनियों को ब्लॉक कर उनमें प्लाक जमा देता है। जिससे हम हृदय रोग से ग्रसित होने के अधिक नज़दीक हो जाते हैं।

किन-किन बीमारियों को न्यौता देता है फास्ट फूड

-पाचनतंत्र

जैसे ही खाना हमारे पाचन तंत्र में पहुंचता है, उसे वहां तोड़कर ग्लूकोस (शुगर) में बदला जाता है। वहां से वह हमारी रक्त वाहिकाओं में मिल जाता है, जिससे बल्ड शुगर लेवल बढ़ता है। ऐसा होने पर हमारा शरीर इंसूलिन को छोड़ता है, इंसूलिन उस ग्लूकोस को मांसपेशियों तक पहुंचा देता है, जिससे बल्ड शुगर लेवल नॉर्मल हो जाता है। लेकिन जैसा कि पहले बताया था कि फास्ट फूड में अधिक मात्रा में केलोरी होती है यानि ज़्यादा मात्रा में ग्लूकोस बनता है। ज़्यादा फास्ट फूड खाने से आपके शरीर में ज़्यादा ग्लूकोस पैदा होगा और उसके उपयोग न होने से आपका वह फैट में बदल कर आपका वजन बढ़ाएगा।

-शुगर एवं फैट

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार आपको दिन में ज़्यादा से ज़्यादा 6-9 टी-स्पून शुगर लेना चाहिए पर कई ऐसी कोल्ड ड्रिंक होती है जिनमें 8 टी-स्पून तक शुगर होती है। फास्ट फूड में शुगर काफी ज़्यादा मात्रा में होती है, जो दिन की निर्धारित मात्रा को भी पार कर सकती है। शुगर आपके दांतों के लिए भी हानिकारक है क्योंकि इसके ज़्यादा सेवन से आपके दांत सढ़ सकते हैं। फास्ट में मौजूद ट्रांस फैट की बात करें तो यह हमारे शरीर के गुड कॉलेस्ट्रॉल को घटाकरक बैड कॉलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, जिससे आप टाइप-2 डायबिटीज व हृदय रोग के शिकार बन सकते हैं।

-सोडियम

सोडियम यानि नमक, यह शुगर और फैट के साथ मिलकर बेशक आपको स्वादिष्ट भोजन का आनंद दे। लेकिन इसकी वजह आपको खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस होने लगेगा। बल्ड प्रेशर के मरीजों के लिए भी यह हानिकारक है, इसकी वजह से रक्त में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है और रोगी बैचेनी महसूस करने लगता है। हृदय के रोगियों के लिए भी यह कम नुकसानदेह नहीं।

-श्वास तंत्र पर प्रभाव

फास्ट फूड के अधिक सेवन से आप मोटापे से शिकार भी हो सकते हैं। ऐसा होने पर आपके हृदय और फेफड़ों पर भार अधिक पड़ता है, जिसके कारण आपको सांस लेने में भी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। थोड़ा सा काम करते ही आपकी सांस फूल जाती है, साथ ही आप अस्थमा के शिकार भी हो सकते है। कई मामलों में देखा जाता है कि मोटापे के कारण लोगों को दिल का दौरा भी पड़ जाता है।

-मस्तिष्क संबंधी बीमारियां

फास्ट फूड के चलते एक प्रोपर डाइट के आभाव में जिसमें सभी प्रकार के मिनरल, विटामिन, आयरन, फाइबर इत्यादि मौजूद हों, लोगों में मस्तिष्क संबंधी मामले भी देखे गए है। दिमागी विकास के लिए एक प्रोपर डाइट जरूरी है जिसमें सभी पोषक तत्व हो लेकिन फास्ट फूड दिमागी विकास करने में असमर्थ है।

क्या कहते हैं फैक्ट्स और रिपोर्ट

  • 2008 में स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा एक स्टडी में कहा गया है कि फास्ट फूड का सेवन बिलकुल उसी प्रकार काम करता है जिस प्रकार किसी व्यक्ति को नशीले पदार्थों की लत लग जाती है।
  • ब्रिटिश जनरल ऑफ न्यूट्रिशन द्वारा 2007 में फीमेल चुहियाओं पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि जिन प्रेगनेंट चुहियाओं ने फास्ट फूड का सेवन ज़्यादा किया, उनके बच्चों में खानपान के मामलों में अस्वस्थ आदतें पाईं गईं।
  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( एम्स) द्वारा एक स्टडी में कहा गया कि लोगों की इनकम बढ़ने से उनमें बाहर जाकर फास्ट फूड चैन में जाकर खाने की आदतें बढ़ी हैं।
  • एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 तक भारतीय फास्ट फूड मार्केट में 18 फीसद तक का इजाफा देखने को मिल सकता है। यह सिर्फ लोगों की बदलती आदतों के चलते।