आहार मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। आहार के बिना जीवनयापन की कल्पना करना असंभव सा है। लेकिन, आहार से ज़्यादा जरूरी है उसका पौष्टिक होना। आहार को आसान शब्दों में हम खाना कहते हैं, लेकिन बात जब पौष्टिक्ता की हो तो आहार को संपूर्ण रूप से समझना जरूरी हो जाता है। आहार की पौष्टिक्ता को मापने के लिए हम उसे दो भागों में बांटते है। पहला भाग मैक्रोन्यूट्रियंट्स और दूसरा भाग माइकोन्यूट्रियंट्स।

1. मैक्रोन्यूट्रियंट्स:

मैक्रोन्यूट्रियंट्स के अंदर कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा यानि फैट आते हैं। यह वह तत्व हैं जो हमारे दैनिक कार्योंको करने के लिए हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं। मैक्रोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा हमारे किसी भी आहार में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से अधिक होती है।

2. माइक्रोन्यूट्रियंट्स:

  • माइक्रोन्यूट्रियंट्स के अंदर विटामिन और मिनरल आते हैं। मसलन विटामिन-ए, बी, डी, सी आदि और फॉस्फोरस, मैंग्नीस, मैगनेशियम, आयरन आदि जैसे मिनरल।
  • इन तत्वों का काम हमारे शरीर के अंगों को स्वस्थ रखने का होता है। यह हमें दैनिक कार्य के लिए ऊर्जा प्रदान नहीं करते, पर जो अंग आहार को ऊर्जा प्रदान करने युक्त बनाते हैं यह उन्हें मजबूती प्रदान करते हैं।
  • यह हमें बेहतर स्वास्थ्य देते हैं। हमारे आहार में कई प्रकार के विटामिन होते हैं, जिनमें से एक है विटामिन-ई। इस विटामिन की आवश्यकता और स्त्रोत पर हम आगे बात करेंगे।

3. क्यों है विटामिन-ई जरूरी?

यूं तो हमारे शरीर के लिए सभी विटामिन का अपना-अपना महत्व होता है, लेकिन उनमें कुछ की खास भूमिका होती है। ऐसे ही विटामिन में प्रमुख है विटामिन-ई।

  • चाहे बात शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाए रखने की बात हो या शरीर को एलर्जी से बचाए रखने की या फिर कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने की, यह विटामिन बहुत फायदेमंद है। विटामिन-ई हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
  • विटामिन-ई वसा में घुलनशील विटामिन है। यानि यह फैट के साथ घुल जाता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में भी कार्य करता है।
  • विटामिन-ई मानव कोशिकाओं की रक्षाभी करता है।
  • यह विटामिन स्वास्थ्य समस्याओं की कई किस्मों को कम करने में सहायता करता है जिसमें कैंसर, दिल की बीमारी और भूलने की बीमारी जैसी कई बीमारियां शामिल हैं।
  • सेल संरक्षण के अलावा, विटामिन-ई प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है।
  • विटामिन-ई नेत्रों की लंबी अवधि तक रक्षा करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार जिनके आहार में विटामिन-ई सहायक मात्रा में होता है वे लोग मोतियाबिंद के शिकार कम होते हैं।
  • त्वचा और बालों के लिए विटामिन-ई के कई लाभ हैं। इसी वजह से कई कॉस्मेटिक उत्पादों में इसका उपयोग किया जाता रहा है। विटामिन-ई को अपनी डाइट में शामिल किया जाना बहुत जरूरी है।

4. विटामिन-ई की गंभीर कमी के लक्षण:

  • शरीर के अंगों का सुचारू रूप से कार्य न कर पाना।
  • मांसपेशियों में अचानक से कमजोरी आ जाना।
  • आंखों के मूवमेंट में असामान्य स्थिति पैदा हो जाना।
  • नजर का कमजोर हो जाना। दिखने में झिलमिलाहट महसूस होना।
  • चलने में लड़खड़ाट होना। कमजोरी महसूस होना।
  • प्रजनन क्षमता कमजोर हो जाना।

5. विटामिन-ई के स्त्रोत:

  • सूरजमुखी के बीज में भरपूर मात्रा में विटामिन-ई पाया जाता है। 100 ग्राम के एक कप में 78% विटामिन-ई होता है। यह सबसे किफायती विटामिन-ई स्त्रतों में से एक है। आप सूरजमुखी के बीज को फ्राई करके भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • बादाम विटामिन-ई के सबसे आम तत्वों में से एक है जिसे हम अपनी रोज की डाइट में शामिल कर सकते हैं। एक कप बादाम में 170% से अधिक विटामिन-ई शामिल होता हैं। बादाम को आप दूध के साथ भी ले सकते हैं।
  • हेजलनट आपकी डाइट में पाया जाने वाला सामान्य तत्व नहीं है। क्योंकि यह बहुत ही महंगा होता है और आसानी से मार्केट में उपलब्ध नहीं है। इसके एक कप में 86% से अधिक विटामिन-ई होता है। इसे काट कर भी खा सकते हैं और सूप में भी मिला सकते हैं।
  • पाइननट एक प्रकार का अखरोट है जिसे सभी प्रकार के व्यंजनों के साथ मिलाया जाता है। यह कई क्रीम में मिला हुआ होता है और परंपरागत रूप से पास्ता बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे सलाद में डाल कर भी खा सकते हैं।
  • मूंगफली विटामिन-ई का बहुत अच्छा स्त्रोत है। यह आसानी से बाजार में मिल जाती है, मूंगफली का सेवन सर्दियों के मौसम में ज्यादा कर सकते हैं।
  • पिस्ता जो कि काफी टेस्टी और हेल्दी भी होता है, इसे आप दूध में मिलाकर या फिर किसी स्वीट डिश या दही में मिलाकर खा सकते है। साथ ही एक्सरसाइज के बाद पिस्ता खाना काफी फायदेमंद होता है।
  • पार्सेले का इस्तेमाल सलाद या किसी तरह की इटालियन डिश में किया जाता है। ताज़ा पार्सेलें में भरपूर मात्रा में विटामिन-ई पाया जाता है।
  • पपीता एक ऐसा फल है जो कि विटामिन-ई का तो अच्छा स्त्रोत है हीसाथ ही यह वजन कम करने के लिये भी बहुत फायदेमंद है। एक पपीते में 17 प्रतिशत विटामिन-ई पाया जाता है।
  • कद्दू के बीजों में विटामिन-ई की अच्छी मात्रा पाई जाती है, इन्हें आप ब्रेड में डालकर भी खा सकते हैं। साथ ही किसी भी प्रकार की ब्रेकफास्ट डिश में भी इसका प्रयोग कर सकते हैं।
  • पालक की एक नहीं कई रेसिपी बन सकती है, इसे सूप में इस्तेमाल करिये या फिर सलाद के तौर पर सेवन करिए। विटामिन-ई का यह सबसे मुख्य स्त्रोत है।
  • जैतून विटामिन-ई का एक बहुत अच्छा स्रोत है। इसमेंबहुत अच्छी मात्रा में विटामिन-ई पाया जाता है। जैतून का कई तरह से सेवन किया जाता है।इसका इस्तेमाल पिज्जा अथवा पास्ता में भी किया जाता है। इसके अलावा जैतून का तेल भी आता है।
  • ब्रोकली वजन कम करने के लिये बहुत लाभदायक होती है, इसकी सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं। साथ ही इसे उबाल कर भी खाया जा सकता है। विटामिन-ई का यह ऐसा स्त्रोत है जो कि आसानी से बाजार में मिल सकता है।
  • एवोकाडो विटामिन-ई के साथ सबसे अच्छे खाद्य पदार्थों में से एक है। इसे आप नाश्ते में फल की तरह या दिन में स्नैक की तरह खा सकते हैं।
  • किवी फ्रूट बहुत ही टेस्टी होता है, इससे आप कस्टर्ड या स्मूथी बना सकते हैं। विटामिन-ई का यह लजीज और बेहतरीन स्त्रोत है।
  • क्रैनबेरी का प्रयोग रस या सॉस बनाने के लिए किया जाता है। इससे आप जेलापिनो साल्सा सहित कई चीजें बना सकते हैं। यह विटामिन-ई समृद्ध खाद्य पदार्थों में से एक है।
  • ब्लैकबेरी काफी स्वादिष्ट फल है, यह विटामिन-ई की कमी को दूर करता है। इसे आप नाश्ते में भी खा सकते हैं।
  • कद्दू का उपयोग सब्जी बनाने के लिये किया जाता है। विटामिन-ई की कमी पूरी करने के लिये इसका उपयोग करें।
  • अंडे को हमेशा से एक संपूर्ण और पौष्टिक खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। इसका उपयोग नाश्ते में दोपहर के भोजन या रात के खाने में किया जा सकता है। यह विटामिन-ई के सबसे खास स्त्रोतों में से एक है।
  • स्विस चार्ड एक तरह की सब्जी है जिसे आप सलाद, सूप आदि के तौर पर इस्तेमाल कर सकते है। एक कप स्विस चार्ड में 17 प्रतिशत विटामिन-ई पाया जाता है।
  • कियूना किसी भी स्टोर में आसानी से मिल जाता है। इसको आप फ्राई करके खा सकते हैं, साथ ही इसे नाश्ते, लंच या डिनर में भी ले सकते है। इसके एक कप में 6 प्रतिशत विटामिन-ई की मात्रा पाई जाती है।

6. विटामिन-ई के कुछ अन्य स्त्रोत:

हमारा शरीर विटामिन-ई का निर्माण नहीं कर सकता है, इसलिए आपको यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि आप इसे पर्याप्त मात्रा में लें। वैसे भोजन से विटामिन-ई प्राप्त करना कोई मुश्किल काम नहीं है। हम सभी खाना बनाने में तेल का उपयोग करते हैं, जो विटामिन-ई के अच्छे स्त्रोत हैं। इसलिए तेल का नियमित सेवन करें। जब भी हमारे शरीर को अधिक मात्रा में विटामिन-ई प्राप्त होता है तो वह उसे स्टोर करके रखता है। जैसा की पहले कहा था कि यह फैट के साथ घुल कर रहता है। यानि जरूरत पड़ते पर हमें विटामिन-ई को सप्लिमेंट के रूप में लेने की जरूरत नहीं है, हमारा शरीर फैट से इस प्राप्त कर लेगा।

7. विटामिन ई की उपयोगिता:

  • त्वचा: विटामिन-ई त्वचा की देखभाल करने और स्वस्थ रखने वाला विटामिन है। यह त्वचा को रूखेपन, झुर्रियों, समय से पहले बूढ़ा होने और सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाता है।
  • लाल रक्त कोशिकाओं: यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है।
  • दिल की बीमारि:कई अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि जिन लोगों के शरीर में विटामिन-ई की मात्रा अधिक होती है,उनमें दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
  • कैंसर: विटामिन-ई कैंसर से भी रक्षा करता है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को कैंसर होता है, उनके शरीर में विटामिन ई की मात्रा कम पाई गई है।
  • अल्जाइमर्स: 2010 में हुए एक अध्ययन के अनुसार जो लोग विटामिन-ई के सप्लिमेंट लेते हैं, उनमें अल्जाइमर्स होने का खतरा कम हो जाता है।
  • रेटिना की सुरक्षा विटामिन-ई दूसरे एंटी ऑक्सीडेंट्स के साथ मिलकर मैक्यूलर डीजनरेशन से बचाता है। यह रेटिना की सुरक्षा भी करता है।
  • डायबिटीज: विटामिन-ई की कमी डायबिटीज का खतरा बढ़ा देती है।
  • इम्यून सिस्टम: यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
  • बाल: विटामिन-ई बाल झड़ने के लिए ली जाने वाली दवाइयों के साइड इफेक्ट को भी कम करता है।
  • कोलेस्ट्रॉल: यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है।